बूढ़े से शादी कर नौकरों से चुदवाती हूँ शादी से पहले भी मैं बहुत लडको के लंड लिए थे.

हाय दोस्तों मैं भी आप की ही जैसी एक औरत हूँ. मैं एक बड़े बिजनेशमेन की वाइफ हूँ. मैं थोड़ी अलग सोच वाली हूँ इसी वजह से घरवालो के लाख समझाने के बाद भी मैंने अपने से ऑलमोस्ट दोगुने उम्र वाले आदमी के साथ शादी मनाई. शादी के कुछ हफ्तों में ही उसका लंड जवाब सा दे गया. मेरी ये पहली लेकिन उसकी दूसरी शादी थी. मेरी उम्र अभी सिर्फ 26 की हे और मैं एक गृहिणी हूँ. घर में पति ने सब सहूलियत और नोकर चाकर की फ़ौज सी रखी हुई हे. एक छोटे से घर से निकल के अब मैं इस महल जैसे घर की रानी बनी हुई हूँ.

मैं दिखने में एकदम स्लिम और सेक्सी हूँ. शादी से पहले भी मैं बहुत लडको के लंड लिए थे. जैसे की हाईस्कूल के टाइम ही मेरी चूत की सिल मेरे से 7 साल बड़े लड़के ने खोली थी. फिर कोलेज में भी मैं लंड लेती थी. मुझे लंड लेने की लत लग गई थी. पर शादी के कुछ दिनों के बाद ही मेरे चुदाई के सब सपने टूटने लगे थे. ऊपर से मेरे बूढ़े पति को ये भी डर था की कही मैं बहार के मर्दों के लंड न ले लूँ. वो रोज मुझे चोदने की कोशिश करता था. लेकिन उसका पानी पचक से छुट जाता था और मैं ठंडी नहीं हो पाती थी. अक्सर उसके सोने के बाद में अपनी चूत में ऊँगली डाल के खुद को शांत करने की कोशिश में लगी रहती थी. लेकिन जो बड़े बड़े लंड से खेल चुकी हो उसके सामने ऊँगली की भला क्या विसात.

चलो अब सीधी बात पर आते हे. मेरा बूढा पति मेरे लिए महंगे ड्रेस, खाने की चीजे, और ऐसे ना जाने कितने अच्छे अच्छे कपडे ले के आता था. और मैं जब घर में वो महंगे वाले कपडे दिन में पहनती थी तो जवान नोकर लोगों के लंड मुझे देख के थिरक उठते थे. और उन दिनों घर में कुछ अजीब सा होने लगा था. अक्सर मैं अपनी धो के सुखाई हुई ब्रा पेंटी को देखती तो उसके अन्दर किसी के वीर्य के निशाँ होते थे. मतलब की कोई मेरे सुखाये हुए अंडरगारमेंट्स में मुठ मारता था और वीर्य की पिचकारी उसके अन्दर ही छोड़ता था. मैंने सोचा की जो मेरी ब्रा और पेंटी का ये हाल करता हे वो मेरी चूत की कैसी ठुकाई करेगा!

अब मैं अपने कपड़ो के ऊपर वाच रखने लगी थी. एक दिन मैंने देखा की कपडे धोने के लिए नोकर सब कपड़ो के साथ मेरी ब्रा पेंटी भी ले गया. उसने बाकी के कपडे तो वाशिंग के लिए मशीन में डाल दिए बस एक ब्लेक पेंटी को अपने पास रख ली. फिर उसने पेंटी में अपनी नाक घुसाई और सूंघने लगा. मैं समझ गई की मेरे अंडरगारमेंट्स में इसका ही वीर्य होता होगा. उसने पेंटी भी धो डाली बाद में. फिर वो किचन के काम के लिए चला गया. दोपहर में वो काम करने के बाद घर के पीछे के सर्वेंट क्वार्टर में गया और मैं टेरेस के ऊपर छिप गई. कपडे वही पर सुख रहे थे. तभी मैंने देखा की हमारा ड्राईवर नारद ऊपर आया. उसने मेरी ब्रा और पेंटी जो सुख रही थी उसे उतार के अपनी पेंट की जेब में डाल दी.

और वो पहले वाले नोकर के पास उसके क्वार्टर में गया. मैं भी चुपके से वहां जा पहुंची. वो दोनों बातें कर रहे थे.

नारद: साले ये देख, मेडम ने आज की पेंटी डाली हे उसके ऊपर फुल बने हुए हे, आग लगा दी मेरे लंड में उसने तो. चल आजा इसके अन्दर लंड हिलाते हे और देखते हे की किसका ज्यादा वीर्य निकलता हे!

साले वो दोनों हरामी मेरी पेंटी के अन्दर वीर्य की चैंपियनशिप का आयोजन कर रहे थे.

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वो दोनों मेरे नाम की मुठ मारने लगे.

इशान: आह मेडम की गांड मार दूंगा अगर कभी अकेली मिली तो.

नोकर (दिनेश): अह्ह्ह अह्ह्ह्ह साली बड़ी चुदासी हे, मैं उसके मुहं में और चूत में लंड पेलूँगा भाई.

और फिर वो एक के बाद एक मेरी पेंटी को अपने लंड के ऊपर घिस रहे थे. वो लोग पेंटी को लान के चारो तरफ रख के उसमे लंड हिला रहे थे. दोनों के लंड एकदम मोटे और लम्बे थे! मेरा मन तो बहुत हुआ की जा के दोनों के लंड पकड़ लूँ और कहूँ की सालो पेंटी को छोडो और अपनी मेडम की चूत और गांड की आग को शांत कर दी भडवो.

मैंने अपने कमरे में जा के एक ट्रांसपेरेंट नाइटी पहन ली. बालों को मैंने खुला कर दिया और वापस वो खिड़की से आ के अंदर देखने लगी. वो दोनों अभी भी अपने लौड़े हिला रहे थे. वो दोनों का वीर्य अभी तक नहीं छूटा था.

नारद: मेडम अपने मइके में एक सरदार लौंडे से चुदती हे दोस्त.

मैं अब रुक नहीं पाई और अन्दर चली गई. वो दोनों मुझे देख के घबरा गए. मैंने अपने ड्राईवर से कहा, अच्छा तो तुम मेरे मइके की बातों की मुखबिरी करते हो.

दोनों ने मुठ मारनी बंद कर दी और सफाई देने लगे.

मैंने कहा: साले हरामियों मेरी पेंटी को गन्दा करते हो!!!

नारद बोला, सोरी मेडम आगे से ऐसा नहीं होगा.

मैंने आगे बढ़ के नारद का बड़ा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी. मैंने कहा, सालो चलो तुम दोनों मेरे कमरे में!

यह कहानी भी पढ़िए ==>  पड़ोसन भाभी की चुदाई

वो दोनों कुछ नहीं बोले और अपने अपने लंड को पेंट में डाल के मेरे पीछे पीछे आ गए. मैंने तिरछी नजर से देखा तो वो दोनों मेरी मटकती हुई गांड को देख रहे थे. नाइटी में मेरी गांड बड़ी सेक्सी जो दिखती हे.

कमरे में घुसते ही मैंने नाइती को खोला और ब्रा पेंटी में बिस्तर के ऊपर लम्बी हो गई. फिर मैंने दिनेश को कहा, जा बहार का मेन गेट बंद कर दे ताकि कोई आये तो हमें पता चले.

और मैंने नारद से कहा, और तू इधर आ हरामी और मेरी चूत को चाट जल्दी से.

साली रंडी कुत्ता किसे कहती हे आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा. दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना – स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मेरे हरामी कहने से नारद को बहुत गुस्सा आया. और मैं खुद चाहती थी की वो इतना गुस्सा करे की गुस्से में ही मेरी चूत को वो जोर जोर से चोदे. उतने में दिनेश भी आ गया. वो दोनों ने मिल के एकदम से मेरी ब्रा और पेंटी के टुकड़े टुकड़े कर दिए और मेरी चूत को चाटने लगा नारद. दिनेश मेरी गांड के पास अपनी जबान निकाल के हलके हलके से प्यार करने लगा और मैंने दोनों के लंड को अपने हाथ में ले लिए.

नारद चूत से मुहं निकाल के बोला, दिनेश भाई आज मेडम को रंडी बना देंगे!

मैंने कहा, सालो तुम दोनों के लंड में वो ताकत नहीं हे हरामियो.

मैं उन्हें जानबूझ के और भी गुस्सा दिला रही थी ताकि वो दोनों जम के मुझे चोदे.

मैंने नारद के लंड को अपने मुहं में ले लिया और उसे मस्त सक करने लगी. वो एकदम से चौंक गया मेरी इस हरकत पर. तभी दिनेश उठा और अलमारी से इंग्लिश दारु की बोतल ले आया. उसने मेरे बदन के ऊपर शराब डाली और फिर दोनों मेरे नंगे बदन को अपनी जबान से चाटने लगे.desi kahani , hindi sex stories ,hindi sex story ,sex story , sex stories , xxx story ,kamukta.com , sexy story , sexy stories , nonveg story , chodan , antarvasna ,antarvasana , antervasna , antervasna , antarwasna , indian sex stories ,mastram stories

फिर दिनेश ने अपने लंड के ऊपर भी शराब डाली और मेरे हाथ में दे दिया. मैं वन बाय वन दोनों के लंड चूस रही थी. नारद ने कहा, मेडम पूरा अन्दर ले लो न.

मैंने उसके लंड को गले तक ले लिया और ग्गग्गग्गग ग्गग्ग्ग का साउंड करते हुए सकिंग देने लगी. दिनेश के मन में भी ऐसे ही अरमान जागे. मैंने उसके लंड को भी गले तक ले लिया. और फिर दोनों के लंड का पानी छुडवा दिया मैंने. मैंने पानी पूरा पी लिया और फिर बोली, दिनेश चलो अब तुम मेरी चाटो.

हाय दोस्तों मैं भी आप की ही जैसी एक औरत हूँ. मैं एक बड़े बिजनेशमेन की वाइफ हूँ. मैं थोड़ी अलग सोच वाली हूँ इसी वजह से घरवालो के लाख समझाने के बाद भी मैंने अपने से ऑलमोस्ट दोगुने उम्र वाले आदमी के साथ शादी मनाई. शादी के कुछ हफ्तों में ही उसका लंड जवाब सा दे गया. मेरी ये पहली लेकिन उसकी दूसरी शादी थी. मेरी उम्र अभी सिर्फ 26 की हे और मैं एक गृहिणी हूँ. घर में पति ने सब सहूलियत और नोकर चाकर की फ़ौज सी रखी हुई हे. एक छोटे से घर से निकल के अब मैं इस महल जैसे घर की रानी बनी हुई हूँ.

मैं दिखने में एकदम स्लिम और सेक्सी हूँ. शादी से पहले भी मैं बहुत लडको के लंड लिए थे. जैसे की हाईस्कूल के टाइम ही मेरी चूत की सिल मेरे से 7 साल बड़े लड़के ने खोली थी. फिर कोलेज में भी मैं लंड लेती थी. मुझे लंड लेने की लत लग गई थी. पर शादी के कुछ दिनों के बाद ही मेरे चुदाई के सब सपने टूटने लगे थे. ऊपर से मेरे बूढ़े पति को ये भी डर था की कही मैं बहार के मर्दों के लंड न ले लूँ. वो रोज मुझे चोदने की कोशिश करता था. लेकिन उसका पानी पचक से छुट जाता था और मैं ठंडी नहीं हो पाती थी. अक्सर उसके सोने के बाद में अपनी चूत में ऊँगली डाल के खुद को शांत करने की कोशिश में लगी रहती थी. लेकिन जो बड़े बड़े लंड से खेल चुकी हो उसके सामने ऊँगली की भला क्या विसात.

चलो अब सीधी बात पर आते हे. मेरा बूढा पति मेरे लिए महंगे ड्रेस, खाने की चीजे, और ऐसे ना जाने कितने अच्छे अच्छे कपडे ले के आता था. और मैं जब घर में वो महंगे वाले कपडे दिन में पहनती थी तो जवान नोकर लोगों के लंड मुझे देख के थिरक उठते थे. और उन दिनों घर में कुछ अजीब सा होने लगा था. अक्सर मैं अपनी धो के सुखाई हुई ब्रा पेंटी को देखती तो उसके अन्दर किसी के वीर्य के निशाँ होते थे. मतलब की कोई मेरे सुखाये हुए अंडरगारमेंट्स में मुठ मारता था और वीर्य की पिचकारी उसके अन्दर ही छोड़ता था. मैंने सोचा की जो मेरी ब्रा और पेंटी का ये हाल करता हे वो मेरी चूत की कैसी ठुकाई करेगा!

अब मैं अपने कपड़ो के ऊपर वाच रखने लगी थी. एक दिन मैंने देखा की कपडे धोने के लिए नोकर सब कपड़ो के साथ मेरी ब्रा पेंटी भी ले गया. उसने बाकी के कपडे तो वाशिंग के लिए मशीन में डाल दिए बस एक ब्लेक पेंटी को अपने पास रख ली. फिर उसने पेंटी में अपनी नाक घुसाई और सूंघने लगा. मैं समझ गई की मेरे अंडरगारमेंट्स में इसका ही वीर्य होता होगा. उसने पेंटी भी धो डाली बाद में. फिर वो किचन के काम के लिए चला गया. दोपहर में वो काम करने के बाद घर के पीछे के सर्वेंट क्वार्टर में गया और मैं टेरेस के ऊपर छिप गई. कपडे वही पर सुख रहे थे. तभी मैंने देखा की हमारा ड्राईवर नारद ऊपर आया. उसने मेरी ब्रा और पेंटी जो सुख रही थी उसे उतार के अपनी पेंट की जेब में डाल दी.

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और वो पहले वाले नोकर के पास उसके क्वार्टर में गया. मैं भी चुपके से वहां जा पहुंची. वो दोनों बातें कर रहे थे.

नारद: साले ये देख, मेडम ने आज की पेंटी डाली हे उसके ऊपर फुल बने हुए हे, आग लगा दी मेरे लंड में उसने तो. चल आजा इसके अन्दर लंड हिलाते हे और देखते हे की किसका ज्यादा वीर्य निकलता हे!

साले वो दोनों हरामी मेरी पेंटी के अन्दर वीर्य की चैंपियनशिप का आयोजन कर रहे थे.

वो दोनों मेरे नाम की मुठ मारने लगे.

इशान: आह मेडम की गांड मार दूंगा अगर कभी अकेली मिली तो.

नोकर (दिनेश): अह्ह्ह अह्ह्ह्ह साली बड़ी चुदासी हे, मैं उसके मुहं में और चूत में लंड पेलूँगा भाई.

और फिर वो एक के बाद एक मेरी पेंटी को अपने लंड के ऊपर घिस रहे थे. वो लोग पेंटी को लान के चारो तरफ रख के उसमे लंड हिला रहे थे. दोनों के लंड एकदम मोटे और लम्बे थे! मेरा मन तो बहुत हुआ की जा के दोनों के लंड पकड़ लूँ और कहूँ की सालो पेंटी को छोडो और अपनी मेडम की चूत और गांड की आग को शांत कर दी भडवो.

मैंने अपने कमरे में जा के एक ट्रांसपेरेंट नाइटी पहन ली. बालों को मैंने खुला कर दिया और वापस वो खिड़की से आ के अंदर देखने लगी. वो दोनों अभी भी अपने लौड़े हिला रहे थे. वो दोनों का वीर्य अभी तक नहीं छूटा था.

नारद: मेडम अपने मइके में एक सरदार लौंडे से चुदती हे दोस्त.

मैं अब रुक नहीं पाई और अन्दर चली गई. वो दोनों मुझे देख के घबरा गए. मैंने अपने ड्राईवर से कहा, अच्छा तो तुम मेरे मइके की बातों की मुखबिरी करते हो.

दोनों ने मुठ मारनी बंद कर दी और सफाई देने लगे.

मैंने कहा: साले हरामियों मेरी पेंटी को गन्दा करते हो!!!

नारद बोला, सोरी मेडम आगे से ऐसा नहीं होगा.

मैंने आगे बढ़ के नारद का बड़ा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी. मैंने कहा, सालो चलो तुम दोनों मेरे कमरे में!

वो दोनों कुछ नहीं बोले और अपने अपने लंड को पेंट में डाल के मेरे पीछे पीछे आ गए. मैंने तिरछी नजर से देखा तो वो दोनों मेरी मटकती हुई गांड को देख रहे थे. नाइटी में मेरी गांड बड़ी सेक्सी जो दिखती हे.

कमरे में घुसते ही मैंने नाइती को खोला और ब्रा पेंटी में बिस्तर के ऊपर लम्बी हो गई. फिर मैंने दिनेश को कहा, जा बहार का मेन गेट बंद कर दे ताकि कोई आये तो हमें पता चले.

और मैंने नारद से कहा, और तू इधर आ हरामी और मेरी चूत को चाट जल्दी से.

साली रंडी कुत्ता किसे कहती हे आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा. दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना – स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मेरे हरामी कहने से नारद को बहुत गुस्सा आया. और मैं खुद चाहती थी की वो इतना गुस्सा करे की गुस्से में ही मेरी चूत को वो जोर जोर से चोदे. उतने में दिनेश भी आ गया. वो दोनों ने मिल के एकदम से मेरी ब्रा और पेंटी के टुकड़े टुकड़े कर दिए और मेरी चूत को चाटने लगा नारद. दिनेश मेरी गांड के पास अपनी जबान निकाल के हलके हलके से प्यार करने लगा और मैंने दोनों के लंड को अपने हाथ में ले लिए.

नारद चूत से मुहं निकाल के बोला, दिनेश भाई आज मेडम को रंडी बना देंगे!

मैंने कहा, सालो तुम दोनों के लंड में वो ताकत नहीं हे हरामियो.

मैं उन्हें जानबूझ के और भी गुस्सा दिला रही थी ताकि वो दोनों जम के मुझे चोदे.

मैंने नारद के लंड को अपने मुहं में ले लिया और उसे मस्त सक करने लगी. वो एकदम से चौंक गया मेरी इस हरकत पर. तभी दिनेश उठा और अलमारी से इंग्लिश दारु की बोतल ले आया. उसने मेरे बदन के ऊपर शराब डाली और फिर दोनों मेरे नंगे बदन को अपनी जबान से चाटने लगे.

फिर दिनेश ने अपने लंड के ऊपर भी शराब डाली और मेरे हाथ में दे दिया. मैं वन बाय वन दोनों के लंड चूस रही थी. नारद ने कहा, मेडम पूरा अन्दर ले लो न.

मैंने उसके लंड को गले तक ले लिया और ग्गग्गग्गग ग्गग्ग्ग का साउंड करते हुए सकिंग देने लगी. दिनेश के मन में भी ऐसे ही अरमान जागे. मैंने उसके लंड को भी गले तक ले लिया. और फिर दोनों के लंड का पानी छुडवा दिया मैंने. मैंने पानी पूरा पी लिया और फिर बोली, दिनेश चलो अब तुम मेरी चाटो.

13 Comments
  1. satish kulkarni
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  2. rohan sharma
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  3. rahul
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  4. karmbir
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  5. mohd usman
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  6. mohd usman
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