आंटी ने खुद अपनी चूची चुसवाई और चूत मरवाई

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मेरा नाम शुभम है मैं नागपुर में रहता हूँ. मैं 18 साल का हूँ. मैं आज आपको अपनी पहली चुदाई की स्टोरी बताने जा रहा हूँ. मुझे लड़कियों से ज़्यादा औरतें अच्छी लगती हैं. मुझे अपने मोहल्ले की ज़्यादातर सारी औरतें अच्छी लगती हैं.. और उन्हें सोच कर मैं मुठ मार लेता हूँ.

एक दिन मैं अपने दोस्त की मम्मी के बारे में सोच कर मुठ मार रहा था, जिनका नाम आरती है. उस वक्त मैं अपने घर के ऊपर वाले कमरे में था और घर में कोई नहीं था.
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मेरे घर के सामने प्रिया आंटी का घर था तो मेरे ध्यान में आरती आंटी के स्थान पर प्रिया आंटी की चूचियां आ गई थीं. मैं पूरी मस्ती से मुठ मार रहा था. तभी मैंने महसूस किया कि सामने से कोई मुझे देख रहा था. मैंने मुठ मारना बंद कर दिया. थोड़ी देर बाद वहां उजाला सा हो गया और  hindi sex stories   देखने वाला शायद नीचे चला गया. थोड़ी देर बाद महसूस हुआ कि कोई फिर से आ गया. अब मैं गौर से देख रहा था, तभी पता नहीं कब प्रिया आंटी अपनी छत पर आ गईं और वहां फिर से उजाला हो गया.

मैंने ठीक से देखा तो वो प्रिया आंटी ही थीं.. वे मुझे देख कर नीचे चली गईं.

मैं डर गया था कि कहीं वो मेरे घर में ना बता दें. मैं जल्दी से उनके घर गया. मैंने देखा कि वो अकेली थीं और उनके दोनों बच्चे स्कूल गए थे और अंकल काम पर गए हुए थे.

आंटी ने छत से उतर कर मैक्सी पहन ली थी. आंटी इस वक्त बड़ी कमाल की माल लग रही थीं. मैंने उन्हें अब तक कभी मैक्सी में नहीं देखा था, हमेशा साड़ी में देखा था. साड़ी में उनकी चिकनी कमर देख कर ही पागल हो जाता था. आज इस मैक्सी में उनके बिना ब्रा के हिलते हुए उनके दूध इतने मस्त लग रहे थे कि क्या बताऊं. अभी मैं उनकी चूचियों की नपाई ही कर रहा था कि उन्होंने मुझे देख लिया.

मैंने कहा- आंटी आपने जो भी देखा, प्लीज़ आप किसी से मत बताना.
प्रिया- मैंने क्या देखा?
मैं- झूठ मत बोलो मैंने आपको देखा था उस छेद से आप मुझे देख रही थीं
प्रिया आंटी ने मुस्कुरा कर कहा- ओके नहीं बताऊंगी.
मैंने थोड़ी राहत की सांस ली.

“तुम ऐसा क्यों कर रहे थे.. तुम्हारी कोई जीएफ नहीं है?”
मैं- जीएफ तो है लेकिन कुछ करने नहीं देती.
मैं उनसे बात तो कर रहा था, लेकिन मेरी नज़रें आंटी के मम्मों पर टिकी थीं.

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आंटी नशीली आवाज में कहने लगीं- ऐसे क्या देख रहे हो.. क्या पीना है इनको?
मैंने सिर झुकाते हुए ‘हाँ’ बोल दिया, तो कहने लगीं- आ जाओ फिर..

मैंने उन्हें सोफे पर बिठाया और उन्हें किस किया. कुछ मिनट किस करता रहा.. कभी आंटी के होंठ चूसता, कभी गर्दन पर चूमता तो कभी गाल पर किस कर देता.

अब जैसे ही मैं उनके कोमल कोमल मम्मों तक पहुँचता, तभी किसी ने गेट खटखटाया और हम दोनों ही अलग हो गए.
मैंने कहा- आंटी कल आप मेरे घर आना.. मैं अकेला रहूँगा.
उन्हें कहा- ठीक है.
फिर गेट खोला तो उनका लड़का स्कूल से आ गया था.

मैं उससे हाय बोल कर घर चला गया और रात भर मुझे सोच-सोच कर नींद नहीं आई कि मैं कल आंटी के साथ क्या क्या करूँगा.

आज मैं कंडोम और आई पिल की गोली ले आया और लंड सहलाता हुआ आंटी की चूचियों को महसूस करता रहा. फिर पता नहीं कब नींद आ गई.
सुबह 8 बजे तक उठा और फिर मैंने जल्दी से कमरा साफ किया. फिर नहा-धो कर आंटी का इंतज़ार करने लगा. दस बजे उनके पति के जाने के बाद वो मेरे घर आ गईं.आप यह कहानी परमसुख डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

मैंने गेट खोला तो देखा कि वो क्या मस्त लग रही थीं. आंटी ने ब्लैक नेट साड़ी पहनी थी. साथ में लाल रंग का स्लीवलैस ब्लाउस में एकदम हिरोइन लग रही थीं. मैं उनको अपने कमरे में ले गया, जो ऊपर था.
वो कहने लगीं- मैं 2 बजे तक चली जाऊंगी.
मैंने कहा- ठीक है.. शाम को पापा भी आ जाएँगे.

फिर मैं उनको किस करने लगा. दस मिनट के बाद मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और अपने दूध की तरफ बढ़ा. मैंने ब्लाउज के बटन खोले तो अन्दर आंटी ने वाइट कलर की ब्रा पहनी हुई थी. उनके दूध इतने बड़े थे कि उनकी ब्रा में आ ही नहीं रहे थे, बाहर निकलने को दिख रहे थे.

मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और ब्रा के ऊपर से ही मैं उन्हें पीने लगा. फिर मैंने ब्रा भी निकाल दी और उनका एक मम्मा पूरा अपने मुँह में भरने लगा.
फिर मैं उनकी नाभि पर किस करने लगा. आंटी ने अपने बाल खोल दिए, मैंने उनकी साड़ी खींच दी और फिर लाल कलर के पेटीकोट, उसके नीचे काले कलर की चड्डी थी. मैंने सब कपड़े उतार दिए. देखा कि आंटी की चुत पर एक भी बाल नहीं था, वो झांटें साफ़ करके आई थीं.

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मैंने उनकी टांगों को सहलाया और उनकी चुत चाटने लगा. अब तक 11:30 हो गया था. मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और फिर जब मैंने चड्डी उतारी. तो वो मेरे लंड को देख कर डर गईं और कहने लगीं- ये बहुत मोटा है.. और लंबा भी है.
मेरा लंड करीब 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है; मैंने कहा- डरो मत.. कुछ नहीं होगा.
फिर मैं कंडोम पहनने लगा तो उन्होंने कहा- इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. मैं गोली लेती हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.
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फिर मैं उनको चोदने जा रहा था तो वो हट गईं.. और वो पहले मेरे लंड को मुँह में भर के चूसने लगीं. मुझे दर्द होने लगा क्योंकि वो बहुत तेज़ चूस रही थीं. हालांकि मुझे बहुत मज़ा भी आ रहा था और देखते ही देखते मैं आंटी के मुँह में ही झड़ गया. आंटी मेरा पूरा रस पी गईं और लंड को चूसती रहीं, जिससे लंड फिर से खड़ा हो गया.

फिर मुँह से लंड निकाल कर मैंने बिना देर किए उनकी चुत पे रख कर एक जोरदार झटका मारा. आंटी की चीख निकल गई. मैंने डर के मारे लंड बाहर निकाल लिया. फिर पहले मैंने तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम चालू कर दिया. अब मैंने फिर से लंड को आंटी की चुत से सटाया और पेल दिया. इस बार लंड बड़े आराम से आधा चला गया. फिर मैंने दो-तीन झटके और मारे, तभी पूरा लंड उसमें समा गया.
आंटी मोटे लंड के कारण चिल्लाती रहीं लेकिन मैं नहीं रूका और 15 मिनट के बाद में झड़ गया.

फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनकी गांडआप यह कहानी परमसुख डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। मारने के लिए उन्हें पलटने लगा तो वो मना करने लगीं.
मैंने कहा- यार, मैं तो आपकी इसका दीवाना हूँ.
आंटी ने मुस्कुरा कर हामी भर दी.

मैं आंटी की गांड को चाटने लगा और फिर 4 शॉट मारके लंड अन्दर कर दिया. आंटी को काफी दर्द हुआ. लेकिन मजा भी आने लगा. आंटी को चोदते-चोदते 3 बार झड़ गया था.
अब 1:00 बज गया, मैंने उनके मुँह में लंड रखा वो लंड चूसने लगीं. फिर मैंने एक और बार उनकी चुत मारी और वो भी झड़ चुकी थीं.

फिर मैंने उनको बांहों में ले कर कुछ देर के लिए लेट गया. ठीक 2 बजे वो कपड़े पहनने लगीं. मैंने उनको किस किया और फिर वो चली गईं.

अब जब भी टाइम मिलता है, हम चुदाई का खेल खेलते रहते हैं.

आपको मेरी आंटी के साथ चुदाई की स्टोरी कैसी लगी.. प्लीज़ मुझे मेल ज़रूर करना!

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