मैं अपनी बीवी, सास और साली के साथ हनीमून मना रहा हु शिमला में

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आप को झटका जरूर लगा होगा, जब आप ने पढ़ा की मैं तीन तीन के साथ हनीमून मना रहा हाउ, तो दोस्तों मैं आपको बता देता हु, आप सही पढ़ रहे है. हां १०० प्रतिशत सच्ची कहानी है मेरी, आप सोच रहे होंगे ना की क्या बात है यार रमेश तेरी तो लाटरी लग गई है. कहा किसी को एक चूत भी नशीब नहीं होता है और एक तुम हो की, तीन तीन चूत को चोद रहे हो वो भी बर्फ पड़ती हुई वादियों के होटल में. हां दोस्तों मैं सच में बहूत ही नशीब बाला हु, क्यों की मुझे तीन तीन देवियों को चोदने का मौक़ा मिला है. उसमे भी तीनो चूत तीन टाइप के, एक बहूत ही टाइट वो है मेरी साली साहिबा, नीतू, दूसरी मेरी बीवी निहारिका, और तीसरी मेरी सास यानी की दोनों बेटियों की माँ रंभा. आज मैं आप लोगो के सामने अपनी ये कहानी antarvasnax.net पे शेयर कर रहा हु,

दोस्तों मैं पहले बहूत ही कहानियां पढ़ी है इस वेबसाइट पर, जिसमे बहूत सारी चुदाई की कहानियां है. कोई गर्ल फ्रेंड की कोई, रिश्ते में, कोई बहन के साथ कोई माँ के साथ, मुझे लगता था की काश मुझे भी ऐसा मौक़ा मिलता ताकि मैं भी वैसे माल को चख सकूँ जो मेरी नहीं है. मेरा ये सपना पूरा हुआ मेरी शादी के बाद. मैं २२ साल हु, इंदौर का रहने बाला हु, मैंने जयपुर से इंजीनियरिंग की और दिल्ली के पास गुडगाँव में जॉब करता हु, माँ को लगता था की एक बहू घर में आ जाये, पर भगवान को ये मंजूर नहीं था मेरी माँ का देहांत हो गया और मैं इस दुनिया में अकेला रह गया. मैं एक शादी के पोर्टल पर फिर से एड दिया अपने शादी का. लड़का : कायस्थ, इंदौर में मकान, जॉब : हर मैंने का वेतन ८० हजार रूपये, घरेलु सुन्दर सुशिल कन्या चाहिए.

कई रिस्ते आने लगे, पर कुछ मुझे पसंद नहीं आता और कुछ लड़कियों को मैं पसंद नहीं आता, कुछ तो मेरे से ज्यादा मेरे परिवार के बारे में ही पूछते, जो की था ही नहीं. एक दिन एक फ़ोन आया, आप पंकज जी बोल रहे है. रात के करीब १० बज रहे थे. मैंने कहा हां जी आप कौन, उन्होंने कहा जी मैं दिल्ली से रंभा, मैं अपनी बेटी के लिए रिश्ता देख रहा था, इस बारे में बात करनी है. मैंने कहा हाँ जी मैंने इन्टरनेट पर अपने शादी के बारे में इस्तहार दिया है. वो काफी कुछ पूछने लगी, और मैं भी अब सोच लिया था जो है सो है. शादी हुई तो ठीक नहीं हुई तो रंडी को ही चोद कर काम चला लूंगा. भांड में जाये परिवार. पर वो मुझमे इंटरेस्ट लेने लगी.

रात को करीब ११ बज गए थे, दोनों बात चित करते करते. फिर उन्होंने कहा की मुझे तो आप फ़ोन पर पसंद हो. पर मैं अब आमने सामने मिलना चाहती हु, उस दिन शनिवार का दिन था दूसरे दिन भी मेरी छुट्टी थी. मैंने कह दिया ठीक है आप जब चाहो मिल सकती हो, उस समय मैं आर के पुरम में रहता था, उन्होंने बताया की मैं पीतमपुरा दिल्ली में रहती हु, कल हम दोनों कनाट प्लेस मेर्टो स्टेशन जो की राजीव चौक है मैं आपका इंतज़ार बाहर करुँगी. मैंने कहा ठीक है. दूसरे दिन सुबह के दस बजे राजीव चौक के बाहर मिलने चले गए. पहले तो मैं इधर उधर देखने लगा. कोई दिखाई नहीं दी. फिर मैंने फ़ोन किया वो मेरे से बस २० मीटर की दुरी पर एक औरत जो की बहूत ज्यादा उम्र की नहीं लग रही थी. लाल कलर की सिल्क की सदी पहनी थी और ब्लैक कलर का चस्मा लगाई थी ब्लैक कलर का पर्श हाथ में था.

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हम दोनों एक दूसरे को देख लिए, और फिर आगे बढे, मैंने नमस्ते कहा उन्होंने भी नमस्ते का जवाब दिया. फिर पास के ही एक कॉफ़ी हाउस में गए. मैं हैरान था की ये लड़की की माँ है. मैंने कहा आप लगती नहीं है की लड़की की माँ है. आप अपने आप को काफी मेन्टेन कर के रखा है. उहोने कहा सुक्रिया, फिर बात चीत आगे बढ़ी. और उन्होंने मुझे पसंद कर लिए. पर अब मेरी बारी थी लड़की देखने की. मैंने कहा आप मुझे लड़की कब दिखाएंगे, तो उन्होंने कहा इस में देर किस बात की, वो पास ही जनपथ में शॉपिंग कर रही है, उन्होंने फ़ोन कर दिया, निहारिका को और नीतू को. दोनों बोली की अभी आ रहे है.

बात चीत आगे बढ़ी मैं भी उनके परिवार के बारे में पूछने लगा वो बताने लगी. की मेरी बस दो बेटिया ही है. मेरे पति से मेरा तलाक हो गया है. मेरा गाँव में भी कुछ नहीं है. मैं बुटीक का काम करती हु, छोटी बेटी पढ़ रही है और निहारिका एक कंपनी में जॉब करती है. घर का खर्च ही निकल पाता है. मुझे ऐसा ही दामाद चाहिए थे जो की मेरे साथ ही रहे एक गार्जियन बन कर. क्यों की मुझे भी सहारे की जरुरत है, मुझे लगा की इससे अच्छा रिश्ता नहीं हो सकता क्यों की मेरी भी पूरी फॅमिली मिल रही थी. मेरे पास पैसे तो खूब थे पर परिवार नहीं था. तभी निहारिका और नीतू आ गई. देख कर मेरे होश उड़ गए.

दोनों एक पर से एक थी. नीतू और निहारिका कौन ज्यादा सुन्दर है मैं ये डिसाइड ही नहीं कर पा रहा था. फिर हम तीनो में बात चीत हुई और फिर, मैं और निहारिका थोड़ा अलग से भी बात की. मुझे वो पसंद आई और मैं भी उसको पसंद, करीब दो बज गए थे. मैंने कहा आप लोगो की शॉपिंग खत्म हो गई तो वो बोली की अभी कहा अभी तो कर ही रही थी तभी मम्मी का फ़ोन आ गया. फिर हम चारो शॉपिंग करने लगे. उन् तीनो को खूब शॉपिंग कराया, और मैंने भी अपने लिए खूब शॉपपिंग की.

मैंने अपने क्रेडिट कार्ड से बिल दिया. खाना खाये और फिर थोड़ा घूम फिर कर वो लोग अपने घर चले गए और मैं अपने घर, फिर रात को बात चीत हुई, शादी की तारीख फिक्स हुई, पर वो लोग बिलकुल सादगी से शादी करना चाहते थे. मैंने भी यही चाहता था. एक दिन हम दोनों की शादी आर्य समाज मंदिर में हो गई. मैं सीधे उनके घर पर ही चला गया था. उस शादी के दिन. रात में मेरी सुहागरात हुई, पत्नी को जम कर चोदा, सुबह उठी तो नीतू ने दरवाजा खटखटाया की उठ जाओ. रात भर जगे थे. सुबह जब सास को देखा वो किचेन में चाय बना रही थी. नीतू भी नहा धो कर तैयार थी. मैं कमरे से बाहर आया मेरी सास मुझे गले लगा ली, बोली की अब आप ही हम लोग के लिए हरेक कुछ हो. दोस्तों मैं थोड़ा सकपका गया. क्यों को मेरी सास अपने सीने से लगा ली उनकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थी. और दबने के बाद ब्लाउज से ऊपर आ रही थी. मैंने भी उनके गले लगा लिया. मेरा लंड उस सास की बाहों की गर्माहट से खड़ा हो गया.

फिर वो किचेन में चली गई. और फिर नीतू भी मेरे गले लग गई. उसकी थोड़ी छोटी छोटी चूचियां थी. मेरे सीने को फिर से गरम कर दी. मेरी साली की गांड बड़ी ही गोल गोल और चेहरा कसा हुआ, चूचियां क्रिकेट की बॉल की तरह, दोस्तों मैं अपने आप को इस दुनिया का सबसे अच्छा व्यक्ति समझ रहा था. आप खुद सोच कर देखिये, मेरे हाथ में तीन तीन लड्डू थे. मेरी सास ४० साल की, मेरी बीवी २० साल की मेरी साली नीतू १८ साल की, और तीनो चिपकने बाले, दिन भर ऐसा ही रहा, मौज मस्ती का. फिर मेरी बीवी और मेरी साली दोनों मंदिर चली गई. पूजा करने के लिए. और मैं और मेरी सास अकेले थे घर में, उन्होंने पूछा पंकज जी. अब आप ही हम तीनो के सब कुछ हो. कभी ऐसा मत करना अपने से अलग मत करना हम तीनो को. मैंने कहा नहीं नहीं ऐसा नहीं होगा. और उनके आँख में आंसू आ गए, मैंने उनको गले से लगा लिया, वो मेरे सीने से चिपक गई और फिर रोने लगी. मैं उनके पीठ को सहला रहा था, पर ये जिस्म की गर्मी मेरे लंड को फिर से खड़ा कर रहा था. दोनों एक दूसरे को सहला रहे थे. अचानक वो मुझे ऊपर मुह कर के देखि उनके होठ फड़फड़ा रहे थे. चूचियां ब्लाउज से ऊपर आ रही थी. पता नहीं क्या हुआ की मेरे होठ उनके होठ पर जाकर रुक गए और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

करीब पांच मिनट तक चूमने के बाद, मेरे हाथ उनकी चूचियों पर पड़ गए और मैं हौले हौले उनके चूचियों को दबाने लगा. वो भी मस्त हो गई, और वो मेरे बाल पकड़ पर मुझे चूमने लगी. मैंने ब्लाउज का बटन खोल दिया. और ब्रा को ऊपर से दबाने लगाया. फिर वही बेड पर लिटा दिया और उनके बदन को चूमने लगा, जैसे ही मैं पेटीकोट उठाया, वैसे ही बेल्ल बज गए, शायद निहारिका और नीतू आ गयी थी. फिर भी मेरी सास ऊँगली से इशारा की. होठ चूमने के लिए मैंने उनके होठ फिर से चूमे, और वो ब्लाउज का बटन बंद करते करते दरवाजे तक गई और फिर दरवाजा खोल दिया.

इस तरह से शाम को जब मेरी सास और मेरी पत्नी, अपना ब्लाउज सिलने के लिए देने गई उस समय मैं और मेरी साली नीतू थी. नीतू को थोड़ा फ़्लर्ट किया और फिर चूचियां दबा दी. नीतू बोली जीजा जी गलत हो गया, आपकी शादी मेरे से होनी चाहिए थी. आप मुझे बहूत अच्छे लगे, खैर मैं तो दीदी से मिल बाँट कर खाऊँगी, और फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. और चूचियां दबाने लगे, तभी निहारिका का फ़ोन आया. की मैं थोड़ा लेट हो जाउंगी. मैं कहा ठीक है. और फिर क्या था. मैंने अपने साली को चोद दिया, वो खूब चुदवाई मेरे से, मैंने पुरे कपडे उतार कर चोदे, एक दिन में मैंने यानी की २४ घंटे में २ चूत के सील तोड़े.

मेरी साली बोली जीजा जी आप कभी मुझे मत छोड़ना, मैंने कहा हो ही नहीं सकता है, मैं आप तीनो को हमेशा साथ रखूंगा, और फिर थोड़े देर में ही निहारिका और मेरी सास आ गई. रात में खाना पीना खाये, सास मेरी एक ग्लास दूध दी उसमे केसर मिला हुआ. मैंने कहा माँ जी बहूत ज्यादा दूध है तो वो बोली अभी आपको दूध पिने की बहूत जरुरत है. और वो मुझे कातिल निगाहों से देखने लगी. मैंने तुरंत ही पूरी ग्लास ख़तम कर दिया. और फिर सोने चला गया. फिर से निहारिका को नंगा कर के चोदा, खूब चोदा, फिर वो सो गई. मुझे पेसाब लगा और मैंने दरवाजा खोल बाथरूम की और जाने लगा, बाथरूम की लाइट जल रही थी. मेरी सास निकली.

सास को देखते ही मैं उनको अपने बाहों में फिर से भर लिया, एक कमरे में निहारिका थी. एक कमरे में नीतू थी. सास काफी कामुक हो गई थी मेरे चूमने से. और चुचिया दबाने से, उसके बाद मैंने वापस उनको बाथरूम में खीच लिया, और दरवाजा बंद कर दिया. उनके एक एक कपडे उतार दिए, और फिर चोदने लगा, मैं दो दिन से लगातार चोद रहा था, पर मुझे ऐसा लग रहा था की मैं एक दो औरत को और भी चोद सकता हु, करीब आधे घंटे चोदने के बाद, मैं झड़ गया, मेरी सास कपडे पहनी और वो सोने चली गई और मैं भी जाकर सो गया, सुबह हुई देखा तो घर में कोई नहीं था, सिर्फ नीतू सोई थी. मैंने इधर उधर आवाज लगाया पर मेरी बीवी नहीं थी ना तो सासु माँ ही थी.

मैंने तुरंत ही नीतू के टॉप को ऊपर किया फिर स्कर्ट को ऊपर कर पेंटी उतार दी. और फिर लंड को चूत पर सेट करते हुए दोनों चूचियों को जोर जोर से पकड़ा और कस के धक्का दिया और नीतू को फिर से पेल दिया, करीब दस मिनट में ही मैं झड़ गया. नीतू फिर से सो गई जैसे ही मैं नीतू के कमरे से बाहर आया. सासु माँ खड़ी थी. मैंने पूछा आप वो बोली हां, मैं बालकनी में थी. पर पंकज जी आपने तो २४ घंटे के अंदर मेरी दोनों बेटियों को और मुझे चोद दिया. मैंने कहा अब तो हम लोग सब साथ साथ रहने बाले है और मेरा सब कुछ तो आपका ही है. यहाँ तक की मेरा 5० लाख का बैंक बैलेंस, इतना सुनते ही मेरी सासु माँ खुश हो गई. वो बोली चलो ठीक है जो मर्जी है आपकी वो करो. मैंने अपनी छोटी बेटी नीतू भी आपको दी.

और फिर उस दिन शिमला जाने का प्लान हुआ, घर में मेरी बीवी को भी ये बात पता चल गया की मैं २४ घण्टेग में उनकी माँ और नीतू को भी चोद चूका हु. पर सब लोग इसलिए खुश थे, क्यों को आज ही मैं अपने प्रॉपर्टी के बारे में बताया, शिमला के लिए टिकेट करवाये, और मैंने पूछा की क्या करना है कितने कमरे बुक करने है. वो तीनो एक दूसरे का मुह देखने लगे और फिर उनलोगों ने बोला की तीन कमरे, और मैंने तीन कमरे बुक किये, और तीसरे दिन, हम तीनो शिमला चले गए. अब बारी बारी से तीनो के साथ हानीमून मनाया, अब तो हम चारों एक साथ रहते है. पर चुदाई अलग अलग करते है. हम चारों में यही डील हुई की, एक रात में एक ही सोएगी मेरे साथ. अब बारी बारी से वो तीनो मेरे साथ सोती है. और मैं तीनो को चोदता हु. दोस्तों आपको antarvasnax.net पे ये कहानी कैसी लगी जरूर रेट करें.

2 comments

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