भाभी के साथ एक दमदार चुदाई की इच्छा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रॉयल है और मुझे पता है कि स्टोरी का नाम पढ़कर ही आप लोगों ने अपने- अपने लंड अपने हाथ में ले लिए होंगे और मेरी प्यारी-प्यारी भाभियों ने भी अपनी उंगली चूत में डाल लेने का मन बना लिया होगा।

जैसे कि मैंने टाईटल में बताया है कि ये मेरी इच्छा है जो कि बहुत जल्द मै इसे सच में बदलने वाला हूँ, लेकिन अभी आपको मेरी इच्छा ही सुनने को मिलेगी, वंदना 102 में रहती है और में 105 में रहता हूँ, वो अपने पति और एक छोटे बच्चे के साथ रहती है।

वो इतनी खूबसूरत और कामुक है ना कि कभी-कभी तो मुझे लगता है अगर ये मान जाये तो इसे भगाकर ले जाऊं और हम कहीं दूर चले जाए और दिन रात सिर्फ़ और सिर्फ़ हम एक दूसरे को चोदे। कुछ-कुछ औरत, लड़की या भाभी को देखकर ऐसा लगता है कि वो बस चोदने के लिए ही बनाई गयी हो और वंदना भी उसी में से एक है।

वो लोग वहाँ किराए पर रहने आए है, उन लोगों को वहाँ रहते हुए लगभग 6-7 महिने हो गये है। फिर एक दिन में अपने घर पर टी.वी. देख रहा था कि तभी बेल बजी तो मैंने उठकर दरवाज़ा खोला तो देखा कि बाहर मेरे सामने वंदना खड़ी थी।

मैंने पहली बार उसे देखा था और ये मेरी उससे पहली मुलाकात थी और मुझे तो पता भी नहीं था कि ये पटाखा मेरे सामने ही रहती है, वो वास्तव में उसके बेटे की बर्थ-डे पार्टी का निमंत्रण देने आई थी। फिर उसने कहा कि तुम्हारी मम्मी नहीं है घर में? तो मैंने कहा कि नहीं वो तो नहीं है बोलिए। तब उसने बोला कि मेरे बेटे की बर्थ-डे पार्टी है कल शाम को 7 बजे आप सबको आना है।

फिर मैंने उनसे पूछा कि आप कहाँ रहते हो? तो उन्होंने कहा कि आपके सामने ही तो रहती हूँ। फिर मैंने कहा कि नहीं सॉरी मुझे मालूम नहीं था कि आप यहीं रहती हो, में मम्मी को बता दूँगा। फिर वो ओके बोलकर चली गई।

अब मेरी मम्मी और भाई उसके यहाँ बर्थ-डे पार्टी में गये थे, में तो काम में व्यस्त था तो इस वजह से नहीं जा पाया, लेकिन अब हम बार-बार लिफ्ट में आते जाते मिलने लगे, मुझे अभी तक उसका नाम नहीं पता था। फिर एक दिन वो अपने बेटे को स्कूल छोड़ने जा रही थी तो में भी तभी अपने ऑफिस के लिए निकला।

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तब मैंने लिफ्ट में उसके बेटे से मस्ती करने के बहाने उसे पहली बार छुआ और उसको छूकर मन में ऐसी आग लगी कि इसे लेकर बेड पर लेटाकर मेरे नीचे दबोच दूँ। फिर उसके बेटे ने मेरी बाईक पर बैठने की ज़िद की। फिर मैंने उसे छोटा सा चक्कर लगवा कर वापस उसकी मम्मी और मेरी मम्मी के पास छोड़ा। आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने कहा कि वंदना, बस साला सरनेम नहीं बताया कि में उसे फेसबुक में सर्च कर पाऊं और उससे बात आगे बढाऊँ। अब में भी उसके साथ खुलकर बात नहीं कर पा रहा था, क्योंकि मुझे थोड़ा सा डर लग रहा कि कहीं सोसाईटी में कुछ प्रोब्लम ना हो ज़ाये।

फिर में वहाँ से चला गया और अभी तक मुझे उसको अपनी फिलिंग बताने का मौका नहीं मिल रहा था। अब में एक सही मौके की तलाश में था, अब आते जाते ही हैल्लो और मेरा उसके बेटे के बहाने उसके घर आना जाना तो चालू था ही। अब वो जिस तरह से मुझे देखती थी तो मुझे ऐसा लगता था कि में जैसे मन में ये सोच रहा हूँ कि में इसके बूब्स दबा रहा हूँ, तो वो भी मन में सोच रही थी कि में इसका लंड चूस रही हूँ।

अब में उसके घर इसलिए जाता था कि हमारी बात कुछ आगे बढ़े, लेकिन में जब भी जाता हूँ तो उसका बेटा इतनी सारी बातें करता है ना कि मुझे उससे तो बात करने का टाईम ही नहीं मिलता और जितना टाईम मिलता भी है तो में उसके दीदार करने में बर्बाद कर देता हूँ, लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि एक दिन वो नंगी मेरे नीचे जरुर सोयेगी और में पूरा नंगा कंडोम पहनकर उसके ऊपर लेटा रहूँगा और उसकी चूत का रस पीता रहूँ, अब में हमेशा से यही चाहता था। दोस्तों ये कहानी आप मस्तराम डॉट नेट पर पड़ रहे है।

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अब में जब भी उसके क्लीवेज देखता हूँ तो मन करता है इसे यही दीवार पर चिपकाकर चालू हो जाऊं, उसके नरम गुलाबी होंठो पर टूट पडूँ और चूस-चूसकर उसके होंठ लाल कर दूँ, उसके कानों पर हल्का सा बाईट करके उसकी जांघ पर से हाथ घुमाते हुए उसकी मदमस्त गांड पकड़ लूँ और उसे अपने लंड पर दबा दूँ। आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

में चाहता हूँ कि वो मुझे नीचे फेंककर मेरे ऊपर चढ़ जाए और अपनी ब्रा निकालकर अपने बूब्स मेरे मुँह में डाल दे और वो अपने हाथों से मेरे कपड़े खोलकर मेरे लंड से खेले। दोस्तों उसकी आँखो में इतना खिंचाव है कि मुझे दिन रात अलग-अलग स्टाईल में उसको चोदने के ख्याल आते रहते है।

अब कभी-कभी वो मेरे घर आई होती है तो मन करता है कि पीछे से जाकर पकड़ लूँ और उसकी गांड पर अपना लंड रखकर मेरे लंड के स्पर्श से उसे अहसास कराऊँ कि मेरा लंड उसके लिए कितना प्यासा है?

फिर एक बार ऐसा ही हुआ वो दही लेकर घर जा रही थी और हमारा टाईम थोड़ा गड़बड़ा गया। में मेरी बाईक तक पहुँच गया था। तभी मैंने उसको बाहर से दही लेकर आते हुए देखा, उसने लाल कलर की ड्रेस पहनी थी और वो बस नाहकर आई होगी, क्योंकि उसके बाल गीले थे जो उसने बाँधकर रखे थे।

सुबह- सुबह इस तरह से उसको जाते देखकर मेरा मन किया कि लिफ्ट में ही इसे दबोच लूँ और कपड़े खोलकर सारा दही इस पर डाल दूँ और फिर में सारा दही चाटकर खा लूँ। फिर उस दिन ऑफिस पहुँचकर मैंने लगातार 3 बार उसके नाम से लंड हिलाया, तब कहीं जाकर मुझे शांति हुई।

अब में बस उसे जल्दी से अपनी बाहों में भरकर उसे चोद डालना चाहता हूँ और में ज़रूर चोदूंगा भी और बहुत जल्द अगली स्टोरी लिखकर आपको बताऊंगा भी कि कैसे मैंने वंदना की चुदाई की? और उसके मजे लिए।

आप अगर मुझे उसे पटाने के लिए कोई टिप्स दे सके तो जरुर दे मै आपके टिप्स का इंतजार करुँगी.

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