पापा ने लिया मेरी जवानी का मज़ा

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हेल्लो मित्रो आज मै फिर से एक मजेदार कहानी लेकर आजिर हूँ आशा करता हूँ आप सभी लोग जरुर पसंद करेगे दोस्तों ये कहानी बाप बेटी पर आधारित है तो मेरे जिन भाई बहनों को बाप बेटी पर आधारीत कहानी नहीं पसंद हो तो वो लोग कृपया मस्ताराम.नेट की दूसरी कहानी का आनंद ले और अगर जो लोग पढ़ रहे है वो अपने गुप्तांगो को हाथ से रगड़ते हुए कहानी का मज़ा लेवे |

संजना अपने पापा की गोद में बैठ तो गयी | मगर उसके चूतडों में भूपेश का लंड बुरी तरह से चुभ रहा था इसलिए वो बार बार वहां से उठने की कोशिश कर रही थी | “क्या हुआ बेटी बार बार क्यों उठ रही हो” भूपेश ने अपनी बेटी को कमर से पकडे हुए ही कहा , “कुछ नहीं पापा बस ऐसे ही” संजना अपने पापा का सवाल सुनकर शर्म से पानी पानी होते हुए बोली …… और मजबूरन वो अब बिना हिले अपने पिता की गोद में बैठी रही |
संजना को महसूस हो रहा था कि उसके पापा का लंड उसके चुप होकर बैठने के बाद बुरी तरह से उसके चूतडों के बीच घुसकर चुभ रहा था | संजना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे, “बेटी तुम्हें पता है बचपन में तुम मेरी गोद में बैठकर ही खाना खाती थी“ भूपेश ने संजना के चुप होकर बैठने के बाद अपने हाथ को उसकी कमर से लेजाकर उसके चिकने पेट पर रखते हुए कहा ……..!

संजना ने अपने पापा की बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुप चाप वहीँ पर बैठी रही | अचानक भूपेश ने अपना मुंह संजना की पीठ पर रख दिया और वो अपने हाथ को अपनी बेटी के जवान चिकने पेट पर फेरने लगा | अपने पिता के हाथ को अपने पेट और उसके मुंह को अपनी पीठ पर महसूस करके संजना की सांसें बहुत जोर से चलने लगी और उसे अपने पूरे जिस्म में अजीब किस्म की सिहरन का एहसास होने लगा |

संजना भी अब गरम होने लगी थी और उसे अपने पिता की हरकतों से मज़ा आ रहा था | संजना इतना गर्म हो गई थी कि अब वो खुद अपने चूतडों को जोर लगा कर अपने पिता के लंड पर दबा कर हिला रही थी , “बेटी तुमने तो आज मुझे तेरे बचपन की याद दिला दी , तू बता तुम्हें केसा महसूस हो रहा है ?” भूपेश ने अपनी बेटी के चूतडों के हिलने से खुश होते हुए उससे सवाल किया |

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पापा मुझे अच्छा लग रहा है ” संजना ने सिर्फ इतना कहा | संजना की बात सुनकर भूपेश को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया | इसीलिए भूपेश ने अब अपने हाथ को अपनी बेटी के चिकने पेट से फिसलाते हुए ऊपर उसकी चुचियों के करीब ले जाने लगा | अपने पापा के हाथ को अपनी चुचियों की तरफ जाते हुए देखकर संजना की सांसें बहुत जोर से चलने लगी और उसका दिल अगले पल के बारे में सोचकर बहुत जोर से धडकने लागा |
भूपेश का हाथ उसकी बेटी की चुचियों के बिलकुल नज़दीक पहुंच चूका था और वो अपने हाथ को बिना रोके ऊपर करता जा रहा था | संजना महसूस कर रही थी कि उसके पिता का हाथ जैसे जैसे उसकी चुचियों के करीब हो रहा था वैसे वैसे उसका लंड जोर के झटके खा रहा था और उसकी सांसें तेज़ होती जा रही थी |

नहीं पापा बस” अचानक संजना को जाने क्या हुआ |उसने अपने हाथ को अपने पापा के हाथ पर रख दिया और उसके हाथ को अपनी चुचियों के पास ही रोक दिया , “अरे सॉरी बेटी मैं तो भूल ही गया कि हमारी बेटी जवान हो चुकी है , लगता है अब तुम्हारे लिए जल्दी ही कोई दूल्हा ढूँढना पड़ेगा” भूपेश ने संजना के हाथ को अपने हाथ पर पड़ते ही कहा |

“पापा अब मैं जाऊं?” संजना ने तेज़ सांसें लेते हुए पूछा | “बेटी बस एक बार मुझे तुम एक किस दे दो ,जैसे बचपन में टॉफ़ी लेने के बाद देती थी”, भूपेश ने अपनी बेटी के पेट से अपने हाथ को हटाते हुए कहा |

“पापा मुझसे नहीं होगा , मुझे शर्म आ रही है”, संजना ने जल्दी से अपने पिता की गोद से उठकर उसके करीब ही सोफे पर बैठते हुए कहा |

संजना की हालत बहुत खराब हो चुकी थी |

उसकी चूत से उतेजना के मारे पानी टपक रहा था |

“बेटी अपने पिता से कैसी शर्म ? ठीक है अगर तुम शर्मा रही हो , तो मैं ही तुम्हें किस कर देता हूँ” भूपेश ने संजना की बात सुन कर खुश होते हुए कहा |

अपने पिता की बात सुनकर संजना की हालत और ज्यादा खराब होने लगी क्योंकि अब भूपेश खुद उसे किस करने वाला था |

“बेटी ऐसा करो तुम अपना सर मेरी गोद में रखकर अपनी आँखें बंद कर लो , मैं खुद ही अपनी फूल जैसी बेटी का किस लूँगा” , भूपेश ने संजना के हाथ को पकड़कर उसे अपने पास खींचते हुए कहा | संजना को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे , बस उसे चुपचाप अपने पिता की बात को मानना था | इसीलिए वो चुपचाप अपने पिता की गोद में सर रखकर लेट गयी |

“ओह्ह्ह्हह्ह मेरी स्वीटी तुम कितनी अच्छी हो” , भूपेश ने अपनी बेटी के सर को अपनी गोद में महसूस करते ही खुश होते हुए कहा और अपने हाथ से संजना के एक गाल की चिकोटी ले ली | भूपेश अब थोडा झुककर अपनी बेटी को किस करने के लिए निचे झुकने लगा | संजना ने जैसे ही देखा कि उसका बाप उसे किस करने के लिए निचे हो रहा है | उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया |

उत्तेजना के मारे संजना की साँसें अब भी बहुत जोर से चल रही थी | भूपेश नीचे झुकते हुए अपनी बेटी की चुचियों को बहुत गौर से देख रहा था क्योंकि संजना की बड़ी बड़ी चूचियां बहुत जोर से ऊपर निचे हो रही थी | भूपेश ने एक नज़र अपनी बेटी के गुलाबी लबों पर डाली और अपने होंठों को उसके गाल पर रख दिया |

संजना को जैसे ही अपने पिता के होंठ अपने गाल पर महसूस हुए उसकी चूत से उत्तेजना के मारे बहुत ज्यादा पानी निकलने लगा | भूपेश अपने होंठों को वैसे ही अपनी बेटी के गालों पर रखे हुए उसके होंठों को घूर रहा था | भूपेश का दिल कर रहा था कि अभी अपनी बेटी के होंठों को अपने मुंह में लेकर जी भरकर चूसे मगर वो ऐसा नहीं कर सकता था |

“आहाहा पापा अब हटो ना” संजना ने सिसकते हुए कहा | दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | “बेटी इतने सालों बाद तुम्हें किस किया है कि अब तुमसे दूर हटने का मन ही नहीं कर रहा” भूपेश ने अपनी बेटी के गालों पर वैसे ही अपना मूह रखे हुए उसकी साँसों को अपने होंठों से टकराते हुए महसूस करके कहा | भूपेश ब अपने होंठों को अपनी बेटी के गालों पर रगड़ते हुए उसके होंठों के करीब ले जाने लगा |

“आहाहाहा पापा बस करिए ना क्या कर रहे हैं” संजना की आँखें बंद थी , मगर वो अपने पिता के लबों के हिलने से समझ चुकी थी कि उसका पिता अपने लबों को उसके होंठों के करीब ला रहा है |

“बेटी थोडी देर चुप रहो और मुझे अपनी गुडिया से खेलने दो” भूपेश ने अपनी बेटी के होंठों के बिलकुल करीब पहुँचते हुए कहा |

संजना ने अपने पापा की सांसों को अपने मूह के इतना करीब महसूस करके अपनी आखों को खोल दिया | संजना ने जैसे ही अपनी आँखों को खोला उसके सामने अपने पिता का चेहरा आ गया, भूपेश ने जैसे ही देखा कि उसकी बेटी ने अपनी आँखें खोल दी हैं , उसने जल्दी से अपने होंठों को अपनी बेटी के गुलाबी होंठों पर रख दिया |

संजना का पूरा जिस्म वैसे ही बहुत ज्यादा गरम हो चूका था जैसे ही उसने अपने होंठों पर अपने पिता के होंठों को महसूस किया वो अपने होश खो बैठी और उसकी चूत से पानी की नदियाँ बहने लगी | संजना को उस वक़्त खुद समझ में नहीं आ रहा था कि आज उसके साथ क्या हो रहा है | संजना ने मज़े से अपने पिता के बालों को जोर से पकड लिया और अपने होंठों को जोर से अपने पिता के मूह में दबाने लगी |

संजना में आये अचानक इस बदलाव को देखकर भूपेश भी हैरान हो गया और वो अपनी बेटी के होंठों को बुरी तरह से चूसने लगा | संजना को तो कोई होश ही नहीं था | जैसे ही वो मज़े की दुनिया से निकली तो उसे अहसास हुआ कि उसने क्या कर दिया है | संजना ने जल्दी से अपने पिता के बालों में से अपने हाथों को हटाकर उसे धक्का देते हुए अपने आप से दूर कर दिया और भागते हुए वहां से निकलकर अपने कमरे में आ गई |
संजना बाथरूम में घुस गयी संजना ने जल्दी से अपने कपडे उतारे और शावर के निचे आकर ठन्डे पानी से अपने जिस्म को शांत करने लगी मगर अपने गरम जिस्म पर ठंडा पानी पड़ते ही उसका जिस्म ठंडा होने की बजाय ज्यादा गर्म होने लगा |
संजना का जिस्म अब भी अपने पिता के साथ होने वाले सीन को सोचकर गर्म हो रहा था उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था कि आज उसे क्या हो गया है | वो एक बार झडकर भी इतनी गर्म क्यों है | संजना को अचानक एक आईडिया आया और वो बाथरूम में निचे बैठकर ऊँगली को अपनी चूत में डालकर अन्दर बाहर करने लगी , संजना अपनी ऊँगली को तेज़ी के साथ अपनी चूत में अन्दर बाहर करते हुए अपने पापा के साथ होने वाली किस को याद कर रही थी , 5 मिनट में ही संजना का जिस्म झटके खाते हुए झडने लगा |

संजना को झडने के बाद कुछ सुकून महसूस होने लगा और वो अपने जिस्म को शावर के निचे ले जाकर ठंडा करने लगी | संजना 20 मिनट तक अपने जिस्म पर ठंडा पानी गिराती रही तब जाकर उसका जिस्म पूरी तरह ठंडा हुआ और वो अपने कपडे पहनकर बाथरूम से बाहर निकल आई | उसने कुछ फैसला कर लिया था |
संजना का दिल बहुत जोर से धडक रहा था | संजना का यह सोचकर ही हाल बुरा हो रहा था कि अगले पल क्या होने वाला है | यह सोचते हुए संजना का पूरा जिस्म तप कर गर्म हो चूका था और वो अपने पापा के कमरे तक पहुच गई और दरवाज़ा खोल कर अंदर चली गयी |
संजना का दिल बहुत जोर से धडक रहा था | संजना का यह सोचकर ही बुरा हाल हो रहा था कि अगले पल क्या होने वाला है | यह सोचते हुए संजना का पूरा जिस्म तप कर गर्म हो चूका था और वो अपने पापा के कमरे तक पहुच गई और दरवाज़ा खोल कर अंदर चली गयी |
भूपेश ने अपनी बेटी को देखा और जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और वापिस अपनी बेटी के पास आकर उसके हाथ को पकड़ कर उसे अपने बेड की तरफ ले जाने लगा |

संजना का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था | उसकी चूत से इतना ज्यादा पानी निकल रहा था कि उसकी पूरी पैंटी गीली हो चुकी थी | भूपेश ने अपनी बेटी को अपने बेड तक ले जाकर बैठा दिया और खुद भी उसके साथ बेड पर बैठ गया |

“बेटी तुम वापिस क्यों चली आई” भूपेश ने बेड पर बैठते ही अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा | संजना ने अपने पापा की बात सुनकर अपना कन्धा निचे कर दिया और कुछ नहीं बोली क्योंकि उसे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी |

“बताओ ना बेटी”, भूपेश ने अपने हाथों से अपनी बेटी के सर को पकड कर ऊपर करते हुए कहा |

“ पिता जी हमें बहुत शर्म आ रही है” संजना ने अपने पिता को देखते हुए कहा |

“अच्छा छोडो बस यह बताओ कि क्या तुम भी मेरी तरह यह सब करना चाहती हो”, भूपेश ने संजना के हाथ को पकड कर चूमते हुए कहा |

“पिता जी मुझे कुछ नहीं पता, मगर आपको देखकर मुझे भी कुछ होने लगा है” संजना ने अपना कन्धा फिर से निचे करते हुए कहा |
“ओह्ह्ह्ह बेटी इसका मतलब तुम्हारा दिल भी अपने पिता के साथ यह सब करने को करता है”, भूपेश ने संजना की बात सुनकर खुश होते हुए कहा और अपनी बेटी का हाथ पकड कर अपनी पेंट के ऊपर सीधा अपने खड़े लंड पर रख दिया |

संजना का पूरा जिस्म अपना हाथ अपने पिता की पेंट पर पड़ते ही सिहर उठा क्योंकि भूपेश का लंड पूरी तरह से तना हुआ था जो संजना को अपना हाथ वहां पर रखते ही महसूस हुआ |

“पापा एक बात कहूँ?” संजना ने भूपेश की तरफ देखते हुए कहा |

“हाँ बेटी बताओ क्या बात है” भूपेश ने खुश होते हुए कहा |
“पिता जी मुझे इतनी शर्म आ रही है कि मैं आपका साथ नहीं दे पाऊँगी, अगर आप अपनी आँखें बंद करके मेरे साथ यह सब करें तो मुझे शर्म नहीं आएगी और मैं आपका साथ भी दूँगी” संजना ने अपना कन्धा निचे करते हुए कहा |

“ठीक है बेटी मैं अपनी आखें बंद कर लेता हूँ , मगर फिर सब कुछ तुम्हें ही करना होगा”, भूपेश ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा |

“ठीक है पापा मगर ऐसे नहीं एक मिनट” संजना ने बेड से उठकर अलमारी से अपनी माँ का एक दुप्पटा उठा लिया और अपने पिता के पास आते हुए उसे उसकी आखों पे कस के बाँध दिया |

“अरे बेटी तुमने तो सच में अँधा बना दिया” भूपेश ने अपनी आखों पर पट्टी बंधने के बाद कहा |

“पापा अभी तो आपकी बाहों को भी बांधना है”, संजना ने अपनी साड़ी को अपने जिस्म से अलग करते हुए कहा |

“बेटी यह ठीक नहीं है , फिर तो मैं तुम्हें छू भी नहीं सकता,” भूपेश ने संजना की बात सुनकर परेशान होते हुए कहा |

“पापा आप चिंता मत करें, मैं आप को किसी शिकायत का मौका नहीं दूँगी”, संजना ने कहा और उसकी शर्ट को उसके जिस्म से अलग करते हुए उसको सीधा बेड पर लिटाते हुए उसके दोनों बाजुओं को ऊपर करके बाँध दिया |

संजना ने अपने पापा को बांधने के बाद बेड से उतरते हुए अपने पूरे कपड़ो को अपने जिस्म से अलग कर दिया और बिलकुल नंगी हो गई |

“अरे बेटा मुझे बांधकर कहाँ चली गयी तुम?” भूपेश ने चिल्लाते हुए कहा | संजना अपने पापा के पास जाते हुए उसकी पेंट को खोलने लगी और पेंट को अपने बाप के जिस्म से अलग करते हुए दूर फेंक दिया | संजना का जिस्म यह देखकर और ज्यादा गर्म होने लगा कि उसके बाप का लंड पेंट के हटते ही उसके अंडरवियर में बड़ा तम्बू बनकर झटके खाने लगा था |

संजना कुछ देर तक अपने पापा के लंड को ऐसे ही अंडरवियर के अंदर झटके खाते हुए देखती रही और फिर वो थोडा ऊपर होते हुए अपने पापा के बालों पर अपना नरम हाथ फिराने लगी |

“आहाह्हा बेटी कितना तडपाओगी, आओ ना अपने पापा के सीने से लग जाओ” , भूपेश ने अपनी बेटी का नरम हाथ अपने सीने पर महसूस होते ही जोर से सिसकते हुए कहा |

संजना का भी उत्तेजना के मारे बुरा हाल था | वो कुछ देर तक अपने हाथों को अपने पिता के सीने पर फिराने के बाद अपने होंठों को उसके सीने पर रख दिया और पागलों की तरह अपने पापा के पूरे सीने को चूमने लगी |

“आह्ह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह” भूपेश अपनी बेटी के होंठों से अपने सीने को चूमने से सिर्फ जोर से सिस्क रहा था |

संजना अब अपनी दोनों टांगों को फेलाकर अपने पिता के ऊपर आ गई और अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को अपने पापा के सीने पर रगड़ने लगी | संजना ऐसा करते हुए बहुत जोर से सिसक रही थी और अपने चूतडों को बहुत जोर से अपने पापा के लंड पर उसके अंडरवियर के ऊपर से रगड़ रही थी |

“ओह्ह्ह्ह बेटी खुद भी ऐसे तड़प रही हो और मुझे भी तडपा रही हो, मेरी बाहों को खोल दो, फिर देखो मैं तुम्हें कितना प्यार देता हूँ”, भूपेश ने सिसकते हुए अपनी बेटी से कहा |

“आहाहह पापा चुप करो और अपनी बेटी की चुचियों का रस चखो”, संजना ने थोडा ऊपर हो कर अपनी एक चूची को अपने पिता के होंठों पर रखते हुए कहा |  दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

भूपेश ने अपनी बेटी की चूची को अपने होंठों पर महसूस करते ही अपना मूह खोल कर संजना की चूची को जितना हो सकता था अपने मूह में भर लिया

और उसे बहुत जोर से चूसने लगा |

“आअहाहहह पापा अपनी बेटी की चूची के रस को पूरी तरह चाट लो , ओह्ह्ह्ह… और बताओ कि आपकी बेटी की चुचियों में ज्यादा रस है या माँ की चुचियों में”, संजना ने अपनी चूची को अपने पिता के मूह में जाते ही उत्तेजना के मारे जोर से सिसकते हुए कहा |

भूपेश अपनी बेटी की बातों को सुनकर पागल हो रहा था और उत्तेजना के मारे बहुत जोर से संजना की चूची को चूसते हुए अपने दांतों से भी हल्का काट रहा था |

“ओह्ह्ह्हह पापा क्या अपनी बेटी की चुचियों को खा जाने का इरादा है क्या?” , संजना ने अपनी चुचियों पर अपने पिता के दांतों के लगते ही जोर से चिल्लाते हुए अपनी चूची को उसके मूह से निकालते हुए कहा |

“आहाह्हहह…. बेटी, क्यों निकाला सच में तुम्हारी चुचियों का रस तुम्हारी माँ से कहीं ज्यादा अच्छा है” , भूपेश ने अपनी बेटी की चूची अपने मूह से निकलते ही जोर से चिल्लाते हुए कहा |

“ओह्ह्ह्हह्ह, पापा लो अब मेरी दूसरी चूची का रस चखो”, संजना ने अब अपनी दूसरी चूची को अपने पिता के होंठों पर रखते हुए कहा |

भूपेश अपनी बेटी की दूसरी चूची को भी वैसे ही चूसने लगा | जैसे उसकी पहली चूची को चूसा था और संजना अभी मज़े से अपने हाथों से अपने पिता के बालों को सहलाने लगी | कुछ ही देर बाद संजना ने अपनी चूची को फिर से अपने पिता के मूह से निकाल दिया और बहुत जोर से हांफने लगी |
“आआह्हा बेटी क्या हुआ”? भूपेश ने अचानक अपने मूह से संजना की चूची के निकलते ही सिसकते हुए कहा |

संजना ने इस बार अपने तपते होंठों को अपने पिता के होंठों पर रख दिया और बहुत जोर से हांफते हुए अपने पिता के होंठों को चूमने लगी | ऐसा करते हुए संजना की चुचियां सीधा उसके पिता के सीने में दब गयी | भूपेश ने जैसे ही महसूस किया कि उसकी बेटी उसके होंठों को चूम रही है तो उसने अपना मूह खोलकर संजना के दोनों होंठों को अपने मूह में भर लिया और उन्हें बहुत जोर से चूसने लगा |

संजना को अपने पिता के साथ किस्सिंग करते हुए अपने पूरे जिस्म में मज़े का एक नया एहसास हो रहा था | भूपेश ने अचानक अपनी बेटी के होंठों को खोलते हुए उसकी जीभ को पकड़कर अपने मूह में भर लिया और अपनी बेटी की शहद से ज्यादा मीठी जीभ को जोर से चूसने लगा | भूपेश की इस हरकत से संजना का पूरा जिस्म कांपने लगा और वो उत्तेजना में आकर अपने पिता की जीभ को पकड़कर चाटने लगी | दोनों बाप बेटी कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठों और जीभ से खेलने के बाद हांफते हुए एक दुसरे से अलग हो गए |

संजना और भूपेश की सांसें एक दुसरे से अलग होते ही बहुत जोर से चलने लगी | वो दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे |

“पापा कैसे लगा आपको अपनी बेटी के होंठों और जीभ का स्वाद?” संजना ने कुछ देर तक हांफने के बाद अपने पापा से पूछा |

“बेटी अब मैं क्या बताऊँ?” शहद से भी मीठी तो तुम्हारी जीभ थी”, भूपेश ने अपनी बेटी को जवाब देते हुए कहा |

“पिता जी अभी तो शुरआत है” , संजना ने इतना कहा और अपनी ऊँगली को अपने पापा के मुंह पर रख दिया |

भूपेश ने अपनी बेटी की ऊँगली को अपने होंठों पर महसूस करते ही अपना मुंह खोल दिया और संजना की ऊँगली को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा |

“पापा एक मिनट मैं अपनी ऊँगली पर कोई टेस्टी चीज़ लगाती हूँ”, संजना ने अपनी ऊँगली को अपने पिता के मुंह से निकालकर अपनी चूत के ऊपर रखते हुए उसमें डाल दिया और उसे पूरी तरह से अपनी चूत के पानी से गीला करते हुए बाहर निकाल लिया |

“बेटी तुम्हारी ऊँगली तो वैसे ही टेस्टी थी,“ भूपेश ने अपनी बेटी से कहा |

“पापा , लो अब इसे चखो”, संजना ने अपनी ऊँगली को फिर से अपने पिता के होंठों पर रखते हुए कहा |

“आअहह्हहह…. बेटी, तुम्हारी ऊँगली से तो बहुत अच्छी गंध आ रही है, क्या लगाया है इसमें?” भूपेश ने अपनी बेटी की ऊँगली से आती हुई खुशबु को सूंघते हुए अपनी सांसों को जोर से पीछे की तरफ खींचते हुए कहा और अपना मूंह खोलकर अपनी बेटी की ऊँगली को अपने मूंह में भरकर चाटने लगा |

भूपेश को इस बार अपनी बेटी की ऊँगली का स्वाद इतना अच्छा लगा कि वो उसकी ऊँगली

को बहुत देर तक अपने मूंह में भरकर चाटता रहा |

“पापा कैसा था स्वाद?” संजना ने अपनी ऊँगली को अपने पिता के मूंह से निकालते हुए कहा |

“ओह्ह्ह…… बेटी, तुमने तो मुझे पागल बना दिया है , मगर बेटी सच बता यह किस चीज़ का स्वाद था” , भूपेश ने अपने मुंह से अपनी बेटी की ऊँगली के निकलते ही बहुत जोर से सिसकते हुए कहा |

“पिता जी क्या आपको पता नहीं चला कि वो किस चीज़ का स्वाद था?” संजना ने निचे होते हुए अपने पापा के लंड पर अंडरवियर के ऊपर से ही अपने हाथों को फेरते हुए कहा |
“ओह्ह्हह्ह बेटी मुझे तो लगा कि वो तुम्हारी चूत का लज़ीज़ पानी था क्योंकि तुम्हारी ऊँगली बहुत ज्यादा नमकीन थी” , भूपेश ने सिसकते हुए कहा |

“वाह पापा आपने तो सच में पहचान लिया”, संजना ने अपने पिता के अंडरवियर को उसकी टांगों से अलग करते हुए कहा |
“बेटी मैं इतना भी बुद्धू नहीं कि अपनी बेटी की चूत का इतना लज़ीज़ स्वाद भी ना पहचान सकूँ”, भूपेश ने अपनी बेटी की बात सुनकर खुश होते हुए कहा |

संजना ने जैसे ही अपने पिता के अंडरवियर को उसकी टांगों से अलग किया | उसके पिता का लंड पूरी तरह तना हुआ नंगा होकर उसकी आँखों की सामने लहराने लगा |

“पापा आपका तो बहुत जोर से झटके खा रहा है“ संजना ने अपने पापा को गौर से देखते हुए कहा और अपना एक हाथ बढाकर अपने पापा के लंड को अपनी मुट्ठी में पकड लिया |
“ओह्ह्हह्ह बेटी यह पगला तो तुम्हारी चूत को सर करने के ख्याल से ही कब से नाच रहा है”, भूपेश ने जोर से सिसकते हुए कहा |
“अह्ह्ह्हह पापा आपका तो बहुत गर्म है” , संजना ने अपने पापा के लंड पर अपना हाथ आगे पीछे करते हुए कहा |

“ओह्ह्ह बेटी इसे सर से सहलाओ” , भूपेश ने अपनी बेटी के नर्म हाथों को अपने लंड पर महसूस करते ही जोर से सिसकते हुए कहा |

संजना अब बहुत तेज़ी के साथ अपने पापा के लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर आगे पीछे करने लगी | भूपेश के मुंह से बहुत जोर की सिसकियाँ निकल रही थी | अचानक संजना ने थोडा निचे झुक कर अपने पिता के लंड को चूम लिया |

“आह्ह्हह्ह बेटी” संजना के ऐसा करने से भूपेश के मुंह से जोर की सिसकी निकल गई और उसके लंड के छेद से प्रीकम की कुछ बूंदे निकलने लगी |

“पापा आपका पानी भी कुछ कम टेस्टी नहीं“ , संजना ने अपनी जीभ निकालकर अपने पापा के प्रीकम को चाटने के बाद कहा |

“ओह्ह्ह्ह बेटी प्लीज अपने पापा के लंड को अपने मुंह में लेकर प्यार करो ना” , भूपेश ने जोर से सिसकते हुए कहा |

“हाँ पापा लेकिन सिर्फ मैं नहीं आप भी मुझसे प्यार करेंगे”, संजना ने कहा और वो उधर से उठते हुए अपने पापा के मुंह के पास आई |
“आहाहाहा बेटी इतनी अच्छी गंध कहाँ से आ रही है, ओह्ह्ह बेटी कहीं ये तुम्हारी चूत तो नहीं” , भूपेश ने ख़ुशी से चिल्लाते हुए कहा | संजना ने अपने पिता को कोई जवाब दिए बगैर उसके लंड को अपने हाथ में पकड़कर चूमने लगी और अपनी चूत को पीछे धकेलते हुए अपने पिता के मुंह पर दबाने लगी |

संजना के ऐसा करने से उसकी चूत भूपेश के होंठों पर दबने लगी | भूपेश भी समझ गया कि यह उसकी बेटी की चूत है | इसीलिए वो संजना की चूत को अपने होंठों से चूमने लगा | भूपेश ने थोड़ी देर तक अपनी बेटी की चूत को चूमने के बाद अपनी जीभ निकालकर उसकी चूत पर फिराते हुए उसके छेद में फेरने लगा |

संजना अपने पिता की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही जोर से सिसकते हुए अपनी चूत को उसकी जीभ पर दबाने लगी और मज़े से अपने पिता के लंड को अपने मूंह में डालकर चूसने लगी | अपना लंड अपनी बेटी के गर्म मुंह में जाते ही भूपेश की भी हालत खराब होने लगी और वो अपनी जीभ को कड़ा करके तेज़ी के साथ अपनी बेटी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा |

संजना की हालत भी अब बहुत खराब हो चुकी थी | उसे अपने पूरे जिस्म में अजीब किसम की सिहरन होने लगी थी और उसे अपने जिस्म में अजीब किसम की सिहरन होने लगी थी और उसका जिस्म बहुत जोर के झटके खा रहा था | संजना उत्तेजना में आ कर अपने पापा के लंड को बहुत जोर से चूसने लगी | इधर भूपेश भी अपनी बेटी की चूत को बहुत तेज़ी के साथ अपनी जीभ से चोदने लगा |

संजना का जिस्म अचानक जोर से काम्पने लगा और उसकी चूत से पानी की नदियां बहने लगी | संजना ने झड़ते हुए मज़े से अपनी आँखें बंद कर ली और मज़े में आकर अपने पिता के लंड को पूरा अपने मुंह में लेकर जोर से चूसने लगी | भूपेश अपनी बेटी की चूत का पानी चाटते हुए खुद भी अपना कण्ट्रोल खो बैठा और उसके लंड से भी वीरज की बारिश होने लगी |

भूपेश का पूरा जिस्म झड़ते हुए जोर से कांप रहा था | संजना अचानक अपने पिता के लंड से गर्म वीरज को अपने मुंह में महसूस करके जितना हो सकता था चाटने लगी और बाकी का वीरज उसके होंठों से निकलकर निचे गिरने लगा | थोड़ी ही देर में दोनों बाप बेटी निढाल होकर अपने मुंह को एक दुसरे से अलग करके जोर से हांफ रहे थे |  दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

“ओह्ह्ह्ह बेटी तुम बहुत अच्छी हो” , थोड़ी देर यूँ पड़े रहने के बाद भूपेश ने संजना से कहा |

“पिता जी कैसा लगा अपनी बेटी का जूस”? संजना ने भी अब सीधा होकर अपने पिता की तरफ देखते हुए कहा |

“बेटी बहुत टेस्टी था , मगर अब तो मेरी आँखों से पट्टी हटाओ , मुझे अपनी बेटी का गोरा और चिकना जिस्म देखना है”

भूपेश ने अपनी बेटी से मिन्नत करते हुए कहा |

“पापा इतनी भी जल्दी क्या है“?, संजना ने निचे होकर अपने पापा के सिकुड़े हुए लंड को अपनी मुट्ठी में भरते हुए कहा |

“बेटी मैं कोई जवान लड़का तो नहीं हूँ, इसीलिए अब मेरा लंड भी इतनी जल्दी नहीं उठेगा , इसीलिए कह रहा था कि मेरी आँखों से पट्टी हटा दो हो सकता है , हो सकता है तुम्हारा खुबसूरत जिस्म देखकर मेरा लंड जल्दी उठ जाए” , भूपेश ने अपनी बेटी से कहा |

“ओह्ह्ह पापा आप बस देखते जाओ , यह कैसे थोड़ी देर में उछलता है”, संजना ने अपने पापा से कहा और निचे झुकते हुए अपने पिता के गीले लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी |

“आआहहह बेटी तुम तो जान ही लेकर रहोगी”, संजना की जीभ को अपने लंड पर महसूस करते ही भूपेश ने जोर से सिसकते हुए कहा |

संजना अपने पिता की टांगों के बीच लेटकर उसके लंड पर अपनी जीभ फेरा रही थी |

संजना अपनी जीभ को अपने पापा के पूरे लंड पर फेरने के बाद नीचे होते हुए उसकी दो बड़ी बड़ी गोटियों पर फेरने लगी |

“अआहहाहाहा बेटी” संजना के ऐसा करने से भूपेश को अपने पूरे जिस्म में मज़े का एक नया एहसास होने लगा और उसके लंड में फिर से जान आने लगी |

संजना ने जैसे ही देखा कि उसके पापा का लंड फिर से उठ रहा है तो उसने अपने एक हाथ से भूपेश की गोटियों को सहलाते हुए अपनी जीभ को उसके चारों तरफ फेरने लगी | भूपेश का लंड अब पूरी तरह तनकर झटके खाने लगा था और उसके मुंह से जोर की सिसकियाँ निकल रही थी |
संजना ने अब थोडा ऊपर होते हुए अपना मुंह खोल दिया और अपने पापा के लंड के सुपाडे को अपने होंठों के बीच लेकर चूसने लगी |

“ओह्ह्ह्ह बेटी और कितना तडपाओगी इसे अपनी चूत में ले लो”, भूपेश ने बहुत जोर से सिसकते हुए कहा |

संजना ने अपने पिता की बात सुनकर उसके लंड को अपने मुंह से निकाला और अपनी दोनों टांगों को फैलाकर अपनी चूत को अपने पापा के लंड पर टिका दिया |

भूपेश ने जैसे ही अपने लंड पर अपनी बेटी की चूत को महसूस किया | उसने निचे से अपने चूतडों को एक धक्का मार दिया | मगर संजना ने अपने हाथ से भूपेश के लंड को पकड लिया | जिस वजह से वो संजना की चूत में ना घुस पाया | संजना अपने पिता के लंड को अपने हाथ में पकडकर अपनी चूत के छेद पर घिसाने लगी | ऐसा करते हुए संजना के मुंह से जोर से सिसकियाँ निकल रही थी

और उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकल रहा था |

भूपेश की हालत भी बहुत खराब हो चुकी थी | वो बहुत जोर से सिसकते हुए छटपटा रहा था | संजना खुद भी बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी | इसलिए उसने अपने हाथ को अपने पिता के लंड से हटा दिया और अपने पूरे वज़न के साथ अपने पिता के लंड पर बैठने लगी | संजना के ऐसा करने से भूपेश का लंड उसकी बेटी की चूत में अपनी जगह बनता हुआ आधे से ज्यादा संजना की चूत में घुस गया |

“ओह्ह्ह बेटी आह्ह्ह क्या गर्म चूत है तुम्हारी , मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे मेरा लंड किसी आग की भट्ठी में चला गया है” , अपना आधे से ज्यादा लंड अपनी बेटी की चूत में घुसते ही भूपेश ने जोर से चिल्लाते हुए कहा |

“आहह्ह्हह्ह पापा आपका लंड भी इतनी उम्र के बावजूद बहुत टाइट है” , संजना ने अपने चूतडों को थोडा ऊपर करके फिर से जोर लगाकर अपने पापा के लंड पर बैठते हुए कहा |

संजना के ऐसा करने से उसके पापा का पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया | संजना अपने पापा का पूरा लंड अपनी चूत में घुसने के बाद बहुत जोर से भूपेश के लंड पर उछलने लगी | अपने पापा के लंड पर उछलते हुए संजना के मुंह से बहुत जोर की सिसकियाँ निकल रही थी |

“ओह्ह्ह्ह बेटी ऐसे ही बहुत मज़ा आ रहा है , आज तुमने मुझे वो मज़ा दिया है जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था” , भूपेश ने अपने लंड को अपनी बेटी की टाइट गर्म चूत में अन्दर बाहर होता महसूस करके जोर से सिसकते हुए कहा |

“आह्ह्ह्ह पापा ….. मुझे भी यह पता नहीं था कि अपने पापा से चुद्वाते हुए ….. मुझे इतना ज्यादा मज़ा आएगा वरना ……………मैं सब से पहले आपसे ही चुद्वाती”, संजना ने भी अपने पापा के लंड पर जोर से उछलते हुए कहा |

“ओह्ह्ह्हह्ह मेरी प्यारी बेटी मुझे नहीं पता था कि तुम मुझसे इतना प्यार करती हो बेटी, अब तो मेरी बाँहों को खोल दो” , भूपेश ने सिसकते हुए अपनी बेटी से कहा |

“आअहह्ह्ह्ह पापा मैं तुम्हारी बाँहों को एक शर्त पर खोलूंगी , आप अपनी आँखों की पट्टी नही खोलोगे” , संजना ने नीचे झुकते हुए अपने पिता से कहा | संजना के निचे झुकने से उसकी दोनों चूचियां उसके पापा के मुंह के पास हो गईं |

“ठीक है बेटी जैसा तुम कहोगी मैं वैसे ही करूँगा” , भूपेश ने कहा और अपनी बेटी की एक चूची को अपनी जीभ से चाटने लगा |

संजना ने अपने पापा की बात सुनकर उसके दोनों बाजुओं से कपडे को खोल दिया और खुद ऊपर उठने लगी | भूपेश ने अपने हाथों के खुलते ही अपनी बेटी को कमर से पकड कर निचे झुका दिया और उसकी एक चूची को अपने मुंह में लेकर चूसते हुए अपने चूतडों को बहुत जोर से उछालते हुए अपना लंड अपनी बेटी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा |

“आआहहह्ह पापा ऐसे ही, और तेज़ ओह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है” , अपने पिता के लंड को अपनी चूत में तूफानी राफ्तार से अंदर बाहर महसूस होता देखकर संजना ने जोर से सिसकते हुए कहा | संजना को इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था कि वो अपने दोनों हाथों से अपने पिता के सर को पकड़कर सहलाते हुए अपनी चुचियों को उसके मुंह में दबाने लगी |

“आअहह्हह बेटी अब बहुत हो चूका

मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर सकता” , भूपेश ने इतना कहा और अपने हाथों को संजना की कमर से अलग करते हुए अपनी आँखों की पट्टी को खोल दिया |

“नहीं पापा” , संजना अचानक अपने पापा की इस हरकत से घबरा गयी और सीधा होते हुए अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढकने लगी |

“ओह्ह्ह मेरी प्यारी बेटी , अब क्यों इतना शर्मा रही हो , मैं तो कब से अपनी बेटी का मखमली बदन देखना चाहता था”, भूपेश ने अपनी बेटी के हाथों को उसकी चुचियों से अलग करते हुए कहा |  दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

“पापा आपने यह ठीक नहीं किया“ , संजना ने शर्म से अपनी आँखों को बंद करते हुए कहा |

“ओह्ह्ह्ह बेटी तुम क्या जानो , इतनी देर से मैं अपनी प्यारी बेटी के इतने सुन्दर जिस्म को ना देखकर कितना तडप रहा था”, भूपेश ने अपनी बेटी को निचे झुकाते हुए कहा | भूपेश ने अपनी बेटी के निचे होते ही उसके होंठों को अपने होंठों पर रख कर चूमते हुए निचे से अपने चूतडों को उछालते हुए अपने लंड को संजना की चूत में अन्दर बाहर करने लगा |

भूपेश अपनी बेटी को बहुत तेज़ी के साथ चोदते हुए उसके दोनों होठों को अपने मुंह में बारी बारी भरकर चाट रहा था | अचानक संजना ने गर्म होते हुए अपनी जीभ को अपने पापा के मुंह में डाल दिया | भूपेश अपनी बेटी की जीभ को अपने मुंह में महसूस करते ही पागल हो गया और उसने अपनी बेटी को कमर से पकड कर सीधा करते हुए खुद उसके ऊपर आ गया |

भूपेश अपनी बेटी की जीभ चाटते हुए अपने लंड को बहुत तेज़ी के साथ उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा | संजना का मज़े के मारे बुरा हाल था | वो मज़े से हवा में उड़ रही थी | उसकी सांसें फूलने लगी थी | संजना ने अचानक अपनी जीभ को अपने पापा के मुंह से निकाल दिया और अपने मुंह को भूपेश के मुंह से अलग करते हुए जोर से हांफने लगी |

भूपेश अब अपनी बेटी की टांगो के बीच खड़ा होकर बैठ गया और संजना की टांगों को उठाकर उसके पेट पर रखते हुए उसको चोदने लगा |

“ओह्ह्ह बेटी क्या प्यारी और सुंदर चूत है तुम्हारी”, भूपेश ने अपनी बेटी की चूत को पहली बार देखते ही जोश में आकर उसकी चूत में जोर से धक्के मारते हुए कहा |

“अआहह्ह्ह पापा आपका तो और ज्यादा टाइट और मोटा होता जा रहा है , ओह्ह्ह ऐसे ही जोर से, मैं झड़ने वाली हूँ”, संजना ने जोर से चिल्लाते हुए अपने चूतडों को ऊपर उछालते हुए कहा | वो अपने पापा के लंड को अपनी चूत में ज्यादा टाइट और मोटा होता हुआ महसूस कर रही थी | इसकी वजह से उसका सारा जिस्म अब अकड़ने लगा था और वो झड़ने के बिलकुल करीब पहूँच चुकी थी |

“अह्ह्ह्ह बेटी यह तुम्हारे जिस्म का ही कमाल है जो इसे देख कर मेरा यह बुढा लंड भी आज जवान होकर तुम्हें चोद रहा है” , भूपेश ने अपनी बेटी की बात सुनकर उसे टांगों से पकडते हुए बहुत जोर के साथ उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए कहा |

“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह पापा इस्स्स्सस्स्स मैं आ रही हूँ” , अचानक संजना का पूर जिस्म कांपने लगा और उसकी चूत झटके खाते हुए अपना पानी छोड़ने लगी | संजना की चूत झड़ते हुए अपने पापा के लंड पर जोर से सिकुड़ गयी जिस वजह से भूपेश भी झड़ने के करीब पहुच गया था |

संजना अपनी आंखें बंद किए हुए मज़े से अपने चूतडों को उठाकर अपने पापा के लंड को अपनी चूत में लेते हुए झड़ने का मज़ा ले रही थी |

“ओह्ह्ह्हह्ह बेटी मैं भी आने वाला हूँ , कहाँ पर झडूं ?” भूपेश ने भी जोर से सिसकते हुए अपनी बेटी से कहा |

“पापा मेरी चूत में ,

आज भर दो अपनी बेटी की चूत को अपने गाढे वीरज से , ताकि इसकी आग कम हो सके” , संजना ने अपने पापा की बात का जवाब देते हुए कहा |

“आअहाआ बेटी ले अपने पापा के वीरज को अपनी चूत में महसूस करो”, भूपेश अपनी बेटी की बात सुनकर तेज़ी से उसकी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करते हुए जोर से हाँफते हुए झड़ने लगा |

“ओह्ह्ह्ह पापा बहुत गर्म वीरज है आपका इश्ह्हह्ह्ह” , संजना भी अपने पापा का गर्म वीरज अपनी चूत में गिरते ही जोर से सिसकने लगी |

भूपेश पूरी तरह झड़ने के बाद अपनी बेटी के ऊपर ही निढाल होकर ढेर हो गया और उसका लंड सिकुड़कर संजना की चूत से निकल गया | संजना की चूत से उसके पापा का लंड निकलते ही उसकी चूत से वीरज निकलकर बेड पर गिरने लगा |

“ओह्ह्ह्ह आई लव यू पापा“, संजना ने अपने पिता को जोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगी |

“ओह्ह्ह्ह बेटी आज मुझे जो मज़ा तुमने दिया है , उसका एहसान मैं कभी नहीं भुला सकता” , भूपेश ने अपनी बेटी के होंठों को चूमने के बाद उसकी साइड में लेटते हुए कहा और अपनी बेटी की गोरी चुचियों से खेलने लगा |

“आआहाह पापा इसमें एहसान की क्या बात है , मैं आपकी ही बेटी हूँ और मैं आपकी मेहनत से ही पैदा हुई हूँ , इसलिए मुझपर सबसे ज्यादा हक आपका ही है”, संजना ने अपने पापा के बालों में हाथ डालकर उसके मुंह को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा |

संजना के ऐसा करने से भूपेश का मुंह उसकी बेटी की दोनों चुचियों के बीच आ गया | भूपेश भी अपनी बेटी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में थामकर जोर से दबाते हुए उन्हें चूमने और चाटने लगा | दोनों बाप बेटी कुछ देर तक ऐसे ही मस्ती करते रहे और कुछ देर बाद संजना अपने पापा से अलग होते हुए बाथरूम जाने लगी |

संजना बिलकुल नंगी ही वहां से उठकर बाथरूम जा रही थी |

संजना के बाथरूम जाते हुए भूपेश की नज़रें अपनी बेटी के नंगे जिस्म को घुर रही थी |
संजना के बाथरूम घुसने के बाद भूपेश भी बेड से उठते हुए अपनी बेटी के पास बाथरूम जाने लगा |
भूपेश अपनी बेटी के बाथरूम जाने के बाद खुद भी उसके पीछे बाथरूम में घुस गया | संजना बाथरूम में निचे बैठकर पेशाब कर रही थी | “पापा आप यहाँ? कुछ तो शर्म कीजिये” , संजना ने अचानक अपने पापा को नंगा ही बाथरूम में दाखिल होता देखकर गुस्से से कहा |
“अरे बेटी अब तुमसे क्या शर्म? मैं तो बस अपनी बेटी के साथ नहाना चाहता हूँ” , भूपेश ने बाथरूम में अन्दर आकर शावर को ओन करते हुए कहा |
“पापा मुझे शर्म आ रही है , मैं आपके साथ नहीं नहा पाऊँगी , मैं जा रही हूँ”, संजना ने पेशाब करने के बाद अपने पापा से कहा और उठकर वहां से जाने लगी |
“बेटी क्यों इतना शर्मा रही हो , बस कुछ ही देर की तो बात है”? भूपेश ने अपनी बेटी को कलाई से पकड़कर अपने साथ शावर के निचे खड़ा करते हुए कहा |
“संजना ने भी अब कोई विरोध नहीं किया और शावर के पानी से अपने पिता के साथ नहाने लगी | भूपेश ने नहाते हुए साबुन उठा लिया और अपनी बेटी की पीठ पर मलने लगा | भूपेश साबुन को संजना की चिकनी पीठ पर मलते हुए निचे होते हुए उसके दोनों चूतडों तक आ गया और अपनी बेटी के दोनों नर्म चूतडों पर साबुन को मलते हुए उन्हें अपने दुसरे हाथ से दबाने लगा |
“अआहाहह्ह्ह पापा क्या कर रहे हो, बस साबुन लगा लिया ना” , संजना ने सिसकते हुए कहा |

“बेटी थोडा झुक जाओ , तुम्हारा हाथ इधर नहीं पहुच पाता, इस लिए यहाँ पर थोड़ी गंदगी है , मैं इसे साफ कर देता हूँ” , भूपेश ने अपनी ऊँगली को संजना के चूतडों के बीच फेरते हुए कहा |
“ओह्ह्हह्ह्ह्ह पापा” संजना ने थोडा झुकते हुए सिसककर कहा | भूपेश अब साबुन को अपनी बेटी की गांड के छेद से निचे लेजाकर उसकी चूत तक मलने लगा | भूपेश के ऐसा करने से संजना के मुंह से जोर की सिसकियाँ निकल रही थी | भूपेश थोड़ी देर तक अपनी बेटी के चूतडों को सही तरीके से साफ करने के बाद उठकर खड़ा हो गया |
भूपेश अब साबुन को अपनी बेटी की दोनों बड़ी बड़ी गोरी चुचियों पर मलने लगा | भूपेश साबुन को अपनी बेटी की चुचियों पर मलते हुए उन्हें अपने हाथ से भी दबा रहा था |
“आह्ह्ह्हह्ह पापा क्या कर रहें हैं आप ?” भूपेश का ऐसा करने से संजना के मुंह से बहुत जोर की सिसकियाँ निकल रही थी | भूपेश अब साबुन को संजना के चिकने गोरे पेट पर मलते हुए निचे ले जाने लगा |

भूपेश का हाथ अब उसकी बेटी की चूत की हलकी झांटों तक आ गया था |

संजना ने मज़े के मारे अपनी आँखें बंद कर ली थी | वो अपने पिता की हरकतों से बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी | भूपेश अब साबुन को अपनी बेटी की चूत पे मल रहा था और संजना मज़े से सिसक रही थी |

भूपेश ने कुछ देर तक अपनी बेटी की चूत को साबुन से साफ़ करने के बाद साबुन को निचे रख दिया और संजना की चूत को गोर से देखते हुए अपने होंठों को उसकी चूत पर रख दिया |  दोस्तों आप यह हिंदी सेक्स कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है |

“ओह्ह्हह्ह्ह्ह पापा क्या कर दिया आपने” , अपने पापा के होंठों को अचानक अपनी चूत पर महसूस करते ही संजना ने जोर से सिसकते हुए कहा |
भूपेश अपनी बेटी को कोई जवाब दिए बगैर उसकी चूत को चूमते और चाटते हुए उसकी चूत पर गिरता हुआ पानी भी चाटने लगा | संजना की हालत बहुत खराब हो चुकी थी | उसका पूरा बदन तप कर आग बन चूका था | भूपेश ने अचानक अपनी एक ऊँगली को अपनी बेटी की चूत के छेद में डालते हुए उसकी चूत के दाने को अपने मुंह में ले लिया और उसे बहुत जोर से चूसने लगा |
संजना अपने पिता की यह हरकत बर्दाश्त न कर सकी और उसका पूरा जिस्म कांपने लगा |
“आहाह्ह्ह्हह इश….. पापा ओह्ह्ह्ह” , संजना ने जोर से सिसकते हुए अपने पापा को बालों से पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी चूत झटके खाते हुए पानी छोड़ने लगी | भूपेश अपनी बेटी की चूत का रस शावर के गिरते हुए पानी के साथ चाटने लगा |

संजना कुछ देर तक यूँ ही अपनी आँखें बंद करके झड़ने लगी |
“बेटी क्या हुआ, मज़ा आया?” कुछ देर बाद जब संजना ने अपनी आखें खोली तो भूपेश ने उठकर उसके सामने खड़ा होते हुए पूछा |

“पापा ….” संजना ने अपने पापा को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनों बाप बेटी एक दुसरे के होंठों को चूमने लगे | कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठों से खेलने के बाद दोनों फ्रेश होकर बाथरूम से निकल गए |

संजना ने बाहर आते ही अपने कपडे पहने और अपने पिता के कमरे से निकलकर अपने कमरे की तरफ चल दी |
|||||समाप्त||||||

2 comments

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