चाय बनाते बनाते मदमस्त चाची की गांड चोद डाली

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सभी लंड धारियों को मेरा लंडवत नमस्कार और चूत की मल्लिकाओं की चूत में उंगली करते हुए नमस्कार। antarvasnax.net के माध्यम से आप सभी को अपनी स्टोरी सुना रहा हूँ। मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी और कामुक स्टोरी पढकर सभी लड़को के लंड खड़े हो जाएगे और सभी चूतवालियों की गुलाबी चूत अपना रस जरुर छोड़ देगी।

मेरा नाम विवेक राजपूत है। मैं 27 साल का जवान और तन्दुरुस्त मर्द हूँ। जवान औरतो को देखकर मेरा लंड फौरन ही खड़ा हो जाता है और मैं उनको चोदने का नया नया उपाय ढूढने लगता हूँ। मैंने अपनी सगी बहन तक को मोटा लंड उसकी चूत में डालकर चोद लिया है पर ये बात और कोई नही जानता है।

अब मेरा अगला शिकार मेरी दीपा चाची होने वाली थी। दीपा चाची बहुत ही गर्म माल थी और बहुत ही चुदक्कड टाइप की औरत थी। मुझे इसके बारे में चाचा से पता चला था। दीपा चाची का एफेयर शादी से पहले उसके पड़ोस के लड़के गुड्डू से था। जब उनकी चाचा से शादी हुई तो चुदवा चुकी थी। सील तुड़वाकर हमारे घर आई थी। कुछ दिनों बाद मेरे चाचा ने उनको अपने पुराने आशिक से फोन पर बात करते पकड़ लिया था। तब ही चाचा को उनके एफेयर के बारे में मालुम हुआ था। जो औरत कई लंड खा चुकी होती है वो जल्दी से पट जाती है। मैं भी शुरू हो गया। दीपा चाची की लाइन मारने लगा। मैंने उनके लिए सोने की एक अच्छी सी अंगूठी बनवा दी और उनको जाकर दी।

“चाची!! आपके लिए” मैंने अंगूठी देकर कहा

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“ये तो बहुत खूबसूरत है। पर विवेक तुझे इसके बदले क्या चाहिये??” चाची हंसकर बोली

“बस!! आपका प्यार मिलता रहे” मैंने बोला और आँख मारी

उसके बाद से सब कुछ अच्छा अच्छा होने लगा। जब चाचा घर पर नही होते दीपा चाची मुझसे खूब बाते करती। हर तरह की बात होती उनसे। वेज और नॉनवेज दोनों तरह की। अब मेरा दिमाग घूमने लगा। फिर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। उनको घूर कर देख रहा था। वो सब समझ गयी। दीपा चाची अच्छे से समझ गयी की उनका भतीजा अब जवान हो गया है और उनकी मस्त मस्त बुर को छककर चोदना चाहता है। कुछ दिन बाद वो ही मुझे आकर पकड़ ली और गले लग गयी। दोस्तों दीपा चाची किसी हिरोइन से कम नही था। भगवान ने उनको बड़ा फुर्सत से बनाया था।

उनका बदन नीचे से उपर तक दूध जैसा गोरा था। चेहरा गोल था और बालो के तो आप पूछो मत। घर पर वो जादातर मैक्सी में रहती थी। कही बाहर जाती तो साड़ी ब्लाउस में जाती थी। चाची अक्सर बैकलेस ब्लाउस पहनती थी जिसमे उनकी सेक्सी पीठ के दर्शन हो जाते थे। उस दिन हम दोनों की मुहब्बत होने लगी। चाची महरून मैक्सी में क्या कयामत दिख रही थी। खुद ही मेरे कमरे में चलकर आ गयी और मुझे पकड़ के गले लगा ली। मैं कैसे पीछे हट जाता। मैं भी शुरू हो गया। खूब किस किया मैंने। मेरा 10 इंच का लंड तो उसी वक्त खड़ा हो गया था।

“ओह्ह चाची!! i love you” मैं कहे जा रहा था और उनके गाल पर पप्पी पर पप्पी लिए जा रहा था

“विवेक!! तुम बहुत अच्छे हो!! ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी…” दीपा चाची कहे जा रही थी

हम दोनों बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड की तरह इश्क लड़ा रहे थे। मेरा हाथ कब उनकी मैक्सी के उपर से आकर उनके दूध पर चला गया मुझे पता ही नही चला। वो भी अब जोश में आ गयी और मेरे गाल, गले और कान पर चुम्मा देने लगी। मेरे कान को दांत गड़ाकर चबाने लगी। दोनों तरह से आग लग गयी। मैंने खड़े खड़े उनके लब पर अपने लब रख दिए और कायदे से चूसने लगा। वो भी मेरे होठो को मुंह में लेकर चूसने लगी। उस दिन बड़ा मजा आया मुझे। उसके बाद कमरे में कोई आ रहा था। दीपा चाची जल्दी से बाहर चली गयी। हमारा इश्क शुरू हो गया था।

बस कोई अच्छा सा मौका ढूढ़ रहा था की उनको चोद सकूं। पर घर में सब लोग रहते थे। जल्दी ऐसा कोई मौका नही मिल रहा था। एक दिन सुबह सुबह दीपा चाची मेरे कमरे में झाडू मारने आ गयी। मैं अपनी चड्डी में हाथ डालकर सोया हुआ था। चाची का देखकर चुदने का दिल करने लगा। दरवाजा अंदर से बंद की और बेड पर मेरे पास आकर बैठ गयी। दोस्तों रात में मैं जब भी सोता था चाची को याद करके मुठ जरुर मारता था। हमेशा अपनी चड्ढी में हाथ डालकर लेटता था। चाची ने मेरा हाथ बाहर निकाला और मेरे चड्ढी को नीचे खिसका दिया। मेरा 10 इंच का लंड खड़ा हुआ था। सुबह सुबह खड़ा ही रहता था।

“ओह्ह कितना बड़ा है तेरा लौड़ा विवेक!!” चाची बोली और हाथ में लेकर फेटने लगी

मैं सोने में मग्न था। मेरा लंड अब किसी बड़े मर्द जैसा मोटा ताजा हो गया था। देखकर ही चाची ललचा गयी। हाथ में पकड़कर जल्दी जल्दी फेटने लगी। धीरे धीरे लंड लोहा बनने लगा। फिर दीपा चाची मुंह में लेकर चूसने लगी। तब जाकर मेरी आँख खुली।

“हा!! चाची!! तुम?? तुम?? इस वक्त??” मैं हैरान होकर बोला

उस वक्त सुबह के 6 बजे थे। घर में सब सो रहे थे।

“शशशश…..घर में सब सो रहे है। चलो मजे करते है। आवाज मत करो। कुछ मत बोलो। बस मजा लेते जाओ” दीपा चाची बोली

उसके बाद मैंने हरकत करना बंद कर दिया। सिर के नीचे बड़ा सा तकिया लगा लिया और चुस्वाने लगा। चाची धीरे धीरे अपना ब्लाउस उतारने लगी। फिर ब्रा को खोल दी। मैंने जब उसकी कसी कसी चूची देखी तो दिमाग गनगना गया। मैं हाथ लगाकर उनके कबूतर सहलाने लगा। दोस्तों दीपा चाची सनी लिओन जैसी माल थी। 36 28 36 का फिगर था उनका। देखकर किसी भी लड़के का लंड खड़ा हो जाता। अब वो और अधिक कामुक होने लगी। बाए हाथ से मेरे 10 इंच लम्बे और 3 इंच मोटे लंड को जल्दी जल्दी उपर नीचे हाथ चलाकर फेट रही थी। अच्छे से खड़ा कर रही थी। मुंह में लेकर ऐसे चूस रही थी जैसे कितने मर्दों का चूस चुकी है। मैं अब उत्तेजना में “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” कर रहा था। क्यूंकि आज से पहले किसी औरत ने मेरा लंड मुंह में नही लिया था। मैंने अपने दोनों हाथो को मोड़ लिया और सिर के नीचे रख दिया।

“ओह्ह yes!! yes चाची!! और चूसो मेरे मोटे लौड़े को!!” मैं कहने लगा

उन्होंने भी अपनी ओर से कोई कंजूसी नही थी। मेरे लाल सुपाड़े को मुंह में लेकर गले तक घुसाकर चूसा। अपने सिर को जल्दी जल्दी नीचे उपर करके चूसा। अब मेरी गोलियों को सहलाने लगी। उसे भी हाथ में लेकर चूसने लगी। मैं पागल हुआ जा रहा था।

“चलो अब अपने दूध पिलाओ आप” मैं कहा

दीपा चाची आकर मेरी गोद में बैठ गयी। मेरे सिर को पकड़ी और खुद ही मेरे मुंह में अपनी 36 इंच की चूची घुसा डाली। और खुद ही चुसाने लगी। अब तो मेरा सपना पूरा हुआ जा रहा था। कितने दिन से सोच रहा था काश उनके मम्मे चूसने को मिल जाते। आज तो मुझे सच में मिल गये थे। मैं भी अन्तर्वासना में आकर चूसने लगा। आप लोग तो जानते ही होंगे की 36 इंच की चूची कितनी बड़ी होती है। एक एक दूध मेरे पूरे मुंह को कवर कर रहा था। मैं उनकी निपल को मुंह में लेकर ऐसे चूस रहा था जैसा उनका बच्चा हूँ। दीपा चाची भी कामुक होकर “……अई…अई….अई…..इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” कर रही थी।

“विवेक!! चूस!! और बेह्तर तरह से चूस!!” वो चुदाई वाले नशे में आकर कहने लगी

मैंने भी पूरी ईमानदारी से दूध चुसाई कर डाली। अब मैंने दीपा चाची को बेड पर लिटा दिया और खुद उपर आ गया। उनके दोनों कबूतर को हाथ से दबाने, मसलने लगा। उनकी चींखे निकलवा दी। मेरी चुदास अब हावी होने लगी। मैं किसी चोदू चुदक्कड मर्द की तरह हावी होकर दोनों कबूतर को दबाने लगा। मुंह में लेकर चूसने लगा। खूब मजा लिया मैंने भी।

“घर में सब सो रहे है। मजे लेगा??” दीपा चाची बोली

“हाँ! मेरी छिनाल!!” मैं बोला

उसके बाद वो साड़ी खोल डाली और पेटीकोट उतार डाली। अपने पैर खोल दी। चाची खुद ही चुदने का निमन्त्रण देने लगी। उसकी चूत पर मेहरून कलर की पेंटी किसी ढोलकी के चमड़े की तरह चपकी हुई थी। मैं पेंटी उतार डाली। मुझे दीपा चाची की भरी पूरी गद्दीदार बुर के दर्शन हो गये थे। उन्होंने खुद ही अपनी चूत को ऊँगली से फैलाकर दर्शन करवा दिया। उसकी चूत किसी टोर्च की तरह चमक मार रही थी। मैं अपना आपा खो दिया और जल्दी जल्दी चाटने लगा। वो “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” करने लगी। मुझे आज बड़े दिनों बाद किसी हसीन औरत की बुर चाटने को मिली थी इसलिए मैं भी बड़ा प्यासा था। अपना पूरा मुंह टिकाकर अच्छे से चूस चाट रहा था। दीपा चाची के बदन में अब आग सी लग रही थी।

इतना जोश में आ गयी कि मेरे सिर को अपनी चूत में धकेलने लगी। उनकी हालत बिगड़ रही थी। मैं भी आज उनको अच्छे से खुश कर देना चाहता था। मैं कोई कमी नही रखना चाहता था। उनकी चूत के दाने को पकड़कर खींच खींच कर चूस रहा था। चाचा ने दीपा चाची को खूब चोदा पेला था इसलिए उनकी बुर में कमल जैसा फूल खिला हुआ था। उनकी चुद्दी की ओंठ किसी कमल के फूल जैसे खिल गये थे जिसे देखकर ही मैं झड़ रहा था।

“आऊ…..आऊ….चूत के अंदर तक जीभ डालो विवेक!!! गहराई से चूसो हमममम अहह्ह्ह्हह” ऐसा चाची कहने लगी

मैं भी उनकी आज्ञा पालन करने लगा। ऊँगली से मैंने उनका भोसड़ा फैला दिया और मस्ती से अंदर तक जीभ डालकर चाटने लगा। दीपा चाची की बुर अब अपना रस छोड़ने लगी। मैंने उसी वक्त उनके फटे भोसड़े में 2 ऊँगली घुसा दी और जल्दी जल्दी अंदर बाहर करने लगा। चाची की माँ बहन एक हो गयी। अपना पेट और कमर उपर करने लगी। उनकी मस्त मस्त अदाये देखकर मुझे बड़ा आनन्द मिलने लगा।

“साली रांड!! बड़ा मजा लूट रही है आज!! अभी तेरे छेद में लंड डालता हूँ!!” मैं बोला

अपने लंड को पकड़कर जल्दी जल्दी जोश भरे तेवर में फेटने लगा। कुछ सेकंड में खड़ा हो गया। फिर मैंने दीपा चाची के भोसड़े में लंड ठेल दिया। वो उछल पड़ी। मैं उनको खाने लगा। धनाधन पेलने लगा। वो सहयोग देकर चुदाने लगी। मेरी वासना अब सब कुछ पार कर गयी थी। मैं उनकी मस्त मस्त चमकदार चुद्दी की तरफ देख देखकर पेल रहा था। सनासन ठुकाई कर रहा था। दीपा चाची बिस्तर पर उछल उछल कर चुदवा रही थी।

“….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” दीपा चाची मुंह खोल खोलकर कामुक आवाजे निकालने लगी

मैं दनादन उनको चोदने लगा। अब वो भी जोश में आ गयी। उन्होंने एक तकिया अपने हाथो में ली ली और उसे ही चुदास में दांत गड़ाकर काटने लगी। इससे उनकी हवस के बारे में पता चल रहा था। उनकी चूत अब भट्टी की तरह तप रही थी। मैं जल्दी जल्दी उनके चमकदार काले भोसड़े में लंड डालकर चोद रहा था। जब जब मेरा लौड़ा अंदर गुफा में सरकता था दीपा चाची को एक विशेष प्रकार संतोष मिलता था। मैंने इसी तरह उनको खूब मस्ती के साथ चोदा। फिर लंड उनकी बुर से बाहर निकाल लिया। उसे हाथ में लेकर फेटने लगा। जल्दी जल्दी फेट रहा था। फिर दीपा चाची की चूत पर सफ़ेद माल की बारिश कर दी। मुझे उनको चोदकर परम सुख मिल गया। जल्दी से वो कपड़े पहनी और चली गयी। दोस्तों अब अक्सर ही उनके दूध दबा लेता था। कभी चूत में ऊँगली कर लेता और चाट लेता। अब मेरा अगला अरमान उनकी गांड चोदने का था।

“चाची!! गांड दो ना!” मैं कहता

“नही!! सिर्फ चूत दूंगी! तेरे चाचा मेरी गांड कभी नही चोदते है। सिर्फ मेरी फुद्दी मारते है” वो कहती

कुछ दिन बाद हम दोनों को मौका मिल गया। मेरे भैया के लड़के का मुंडन कार्यक्रम था। सब लोग बाहर मन्दिर में गये हुए थे। घर पर मैं और दीपा चाची थी। इस बात का कोई पता नही था की घर वाले कब आएँगे। पर आज मुझे उनकी गांड में लंड डालना था। दोपहर को चाची का चाय पीने का बड़ा दिल करने लगा। किचन में जाकर बनाने लगी। मैं पीछे से पहुच गया। उस दिन दीपा चाची ने रेड कलर की फ्लावर प्रिंटेड मैक्सी पहनी थी। हाफ मैक्सी में उनकी दूधियाँ बाहे वैसे ही कितनी सेक्सी दिख रही थी। वो चाय को उबाल रही थी। इतने में मैं पहुच गया और उनको पीछे से दबोच लिया।

““उ उ उ उ उ……विवेक!! तुमने से डरा ही दिया मुझे!! मैं तो घबरा ही गयी थी” दीपा चाची बोली

“चाची!! आज घर में कोई नही है!! गांड दो ना प्लीससस” मैं पीछे से उनके गले पर किस करते हुए बोला

शुरू में न न करती रही। पर मैंने पीछे से ही पकड़कर उनके दूध पर हाथ रखकर जब दबाना और मसलना चालू किया तो मान गयी। वो समझ गयी की बिना गांड चोदे मैं आज नही मानूंगा। उनको गैस ऑफ़ करनी पड़ी। चाय पीने का टाइम नही था उनके पास। मैंने उनको अपनी ओर घुमा दिया। chachi ki chudai वो मेरे सामने आ गयी। मैं उनके मुंह पर मुंह रखकर उनके कयामत जैसे लब चूसने लगा। वो पूरा सहयोग कर रही थी। तभी मैंने उनको बाहों में भर लिया और सीने से लगा लिया। वो मुझे चाचा की तरह प्यार करने लगी।

“……अअअअअ आआआआ… विवेक!! कितने प्यारे हो तुम!!!” वो कहने लगी

मैंने उनको सीने से चिपकाये रखा और हाथ उनके पिछवाड़े पर चले गये। दोस्तों मैक्सी के उपर से उनकी बड़ी बड़ी 36 इंच की गांड को सहलाने लगा। फिर जोर जोर से दबाने लगा। उनके मस्त मस्त चूतड़ को मसल रहा था।

“विवेक!! मेरी गांड आज तुम्हारी है। चोद डालो इसे” दीपा चाची किसी रांड की तरह बोली

मेरा खून उबल गया ये बात सुनकर। उसी वक्त किचन में उनको घोड़ी बना दिया। उनकी मैक्सी को उपर सरका दिया। उनकी पेंटी नीचे की। सामने उनकी कसी कसी गांड मेरा इंतजार कर रही थी। दीपा चाची गोरी थी पर गांड भूरी और काले रंग के मिले जुले रंग की थी। मैंने पहले उनके चूतड़ पर दांत गड़ा दिया। उसे चाटने लगा। फिर गांड के छेद को चाटने लगा। जब जब मेरी जीभ छेद के उपर से गुजरती तो दीपा चाची को विशेष मजा मिलता। मैं मन लगाकर गांड चूसने लगा। जीभ अंदर डालने लगा। वो “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी। मैंने 10 मिनट उनकी गांड पी। फिर अपनी जींस उतारी। लंड को जल्दी जल्दी मुठ देकर ताव देने लगा। लंड टनक गया।

मैंने हाथ में थूक लेकर लंड पर मल दिया और दीपा चाची की गांड में डालने लगा। मुझे बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी क्यूंकि बड़ी कसी गांड थी। मैं मेहनत करता रहा। फिर कामयाबी मिल गयी। पहले तो 5 इंच अंदर घुस गया। फिर मैंने उपर से उनके छेद में थूक दिया। अब चाची की गांड पूरा 10 इंच लंड खा गयी। मैंने उनके बड़े बड़े तरबूज (चूतड़) को कसके पकड़ा और गांड चोदने लगा। वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। मैं धीरे धीरे कर रहा था। इस तरह से मैं काफी देर टिक पाया। खूब गांड चोदी, फिर माल उसी छेद में गिरा दिया। आज भी वो सिलसिला जारी है। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज के लिए antarvasnax.net पढ़ते रहना। आप स्टोरी को शेयर भी करना।

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